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उत्तराखंड कौथिग 2026: 10 दिवसीय सांस्कृतिक मेले में परंपराओं का संगम

उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से, अखिल गढ़वाल सभा देहरादून ने 24 अक्टूबर से 2 नवंबर तक रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड में 10‑दिन का ‘उत्तराखंड कौथिग‑2026’ आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के पारंपरिक खानपान, लोकगीत, नृत्य और कलाओं को एक मंच पर लाकर जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना है।

गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अखिल गढ़वाल सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना और महासचिव गजेंद्र भंडारी ने कार्यक्रम के विस्तृत कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मेले के माध्यम से न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी अपने हुनर का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा।

कौथिग का उद्घाटन 24 अक्टूबर को शाम पाँच बजे ध्वज पूजन के साथ हुआ, जिसके बाद शाम छह बजे रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड में जोशीमठ का पौणा नृत्य, अल्मोड़ा का छोलिया नृत्य और जौनसार क्षेत्र के नंदलाल भारती के दल की प्रस्तुतियाँ की गईं। 25 अक्टूबर को महिलाओं द्वारा थड़या और चौफला नृत्य का प्रदर्शन हुआ, जबकि उसी दिन सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री बसंती बिष्ट, रोहित चौहान, भूपेंद्र बसेड़ा, अनिल बिष्ट और अज्जू तोमर ने अपनी कलात्मक प्रस्तुतियाँ दीं।

संगीत और नृत्य के अलावा, कौथिग में स्कूली छात्रों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता, समूहगान प्रतियोगिता, और उत्तराखंडी आंचलिक वेशभूषा प्रतियोगिता जैसी गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। 27 अक्टूबर को शाम छह बजे विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य भी प्रदर्शित हुए, जबकि 29 अक्टूबर को पौराणिक पांडव नृत्य और गेंडा वध के साथ गढ़वाली कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।

अंतिम दिन, 2 नवंबर को सुबह 11 बजे प्रसिद्ध लोकगाथा ‘चक्रव्यूह’ का मंचन किया गया, और शाम छह बजे समापन सांस्कृतिक संध्या में किशन महिपाल, दर्शन फर्स्वाण, हेमा करासी नेगी, दीपा नगरकोटी और नरेश बादशाह ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। इस 10‑दिन के मेले के दौरान पहाड़ के पारंपरिक उत्पाद, हस्तशिल्प, पहाड़ी व्यंजन और अन्य विशेष वस्तुओं के स्टॉल लगाए गए, साथ ही बच्चों के लिए मनोरंजन स्टॉल भी उपलब्ध रहे। हर दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक हेल्थ नेटवर्किंग संस्थान द्वारा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया, जिससे प्रतिभागियों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ भी मुहैया कराई गईं।

Original Title: 24 अक्टूबर से शुरू होगा उत्तराखंड कौथिग-2026, लोक संस्कृति के रंगों से सजेगा रेंजर्स ग्राउंड

Original Content: उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक खानपान और समृद्ध विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अखिल गढ़वाल सभा देहरादून की ओर से 24 अक्टूबर से 2 नवंबर तक रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड में 10 दिवसीय ‘उत्तराखंड कौथिग-2026’ का आयोजन किया जाएगा। कौथिग में प्रदेश की लोक परंपराओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों और लोककलाओं की झलक देखने को मिलेगी।

24 अक्टूबर से शुरू होगा उत्तराखंड कौथिग-2026

गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अखिल गढ़वाल सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना और महासचिव गजेंद्र भंडारी ने कौथिग के कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोजन के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।

कौथिग का उद्घाटन 24 अक्टूबर को शाम पांच बजे रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड में ध्वज पूजन के साथ होगा। शाम छह बजे से उत्तराखंड के पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इनमें जोशीमठ का पौणा नृत्य, अल्मोड़ा का छोलिया नृत्य और जौनसार क्षेत्र के नंदलाल भारती के दल सहित अन्य कलाकारों की प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी। 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजे महिलाओं की ओर से थड़या और चौफला नृत्य का प्रदर्शन किया जाएगा। शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री बसंती बिष्ट, रोहित चौहान, भूपेंद्र बसेड़ा, अनिल बिष्ट और अज्जू तोमर अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

स्कूली बच्चों और युवाओं को भी मिलेगा मंच

26 अक्टूबर को सुबह 11 बजे स्कूली छात्र-छात्राओं की चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित होगी। शाम छह बजे स्कूलों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों की ओर से लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी जाएगी। 27 अक्टूबर को महिलाओं की उत्तराखंडी आंचलिक वेशभूषा प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसी दिन शाम छह बजे देश के विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य भी प्रस्तुत किए जाएंगे।

28 अक्टूबर को सुबह 11 बजे स्कूली विद्यार्थियों की समूहगान प्रतियोगिता होगी। शाम छह बजे प्रसिद्ध कलाकार सौरभ मैठाणी, गजेंद्र राणा, बिशन हरियाला, रेशमा शाह और मंजू सुंदरियाल अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।

29 अक्टूबर को सुबह 11 बजे पौराणिक पांडव नृत्य और गेंडा वध का प्रदर्शन होगा। शाम छह बजे प्रसिद्ध कवियों की ओर से गढ़वाली कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। वहीं, 30 अक्टूबर को दिव्यांग अनुरागी बंधुओं की ओर से लोकगीत प्रस्तुत किए जाएंगे। शाम को गढ़वाली रामलीला का मंचन होगा।

नरेंद्र सिंह नेगी और प्रीतम भरतवाण की प्रस्तुतियां होंगी खास

31 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। शाम की सांस्कृतिक संध्या में गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, संगीता ढोंडियाल, रमेश बाबू गोस्वामी, सनी दयाल और संतोष खेतवाल लोकगीतों की प्रस्तुति देंगे। एक नवंबर को सुबह 11 बजे उत्तरकाशी के कलाकारों की ओर से लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। शाम की सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री प्रीतम भरतवाण, मीना राणा, विवेक नौटियाल, खुशी जोशी और मनोज सागर अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

चक्रव्यूह की लोकगाथा के मंचन के साथ होगा समापन

कौथिग के अंतिम दिन दो नवंबर को सुबह 11 बजे प्रसिद्ध लोकगाथा चक्रव्यूह का मंचन किया जाएगा। शाम छह बजे आयोजित समापन सांस्कृतिक संध्या में किशन महिपाल, दर्शन फर्स्वाण, हेमा करासी नेगी, दीपा नगरकोटी और नरेश बादशाह प्रस्तुति देंगे। 10 दिवसीय कौथिग में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पहाड़ के पारंपरिक उत्पादों, हस्तशिल्प, पहाड़ी व्यंजनों और अन्य विशेष उत्पादों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। बच्चों के मनोरंजन के लिए भी विभिन्न स्टॉल और साधन उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक हेल्थ

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।