दिल्ली में अंकिता भंडारी हत्याकांड के पीड़ित परिवार पर पुलिस कार्रवाई के तुरंत बाद, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक नया राजनीतिक संकट गहरा गया है। गुरुवार को, कांग्रेस पार्टी ने ‘कथित VIP’ की भूमिका और न्यायिक प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को लेकर एक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। इस घटनाक्रम ने न केवल राज्य की राजनीति को हिलाकर रख दिया, बल्कि पुलिस और विपक्षी दलों के बीच तनाव को भी चरम पर ले गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जिससे स्थिति और गर्मा गई।
प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह जैसे दिग्गजों ने किया। कांग्रेसी शीर्षक यह स्पष्ट किया कि उनकी मुख्य मांग अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित तौर पर उच्च पदस्थ व्यक्तियों (VIP) की संलिप्टता से जुड़े सवालों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाने की है। पार्टी का दृढ़ आश्वासन है कि न्यायिक प्रक्रिया के हर पहलू को प्रकाश में लाया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या अनदेखी की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस संदर्भ में, कांग्रेस ने भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी की मांग है कि जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए, जोकि पीड़ित परिवार की भी एक प्रमुख मांग है।
इस विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में बुधवार की दिल्ली में हुई घटनाओं की भूमिका निर्णायक रही। अंकिता के माता-पिता, जो अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर इंडिया गेट के पास धरने पर बैठे थे, को गुरुवार तड़के करीब चार बजे दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन इस कार्रवाई ने विपक्षी दलों में भारी गुस्सा उड़ा दिया। कांग्रेस नेताओं ने इसे पीड़ित परिवार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश olarak देखा और इसके तुरंत विरोध में देहरादून में लोकभवन की ओर कूच किया। प्रदर्शन के दौरान, गणेश गोदियाल और कुछ अन्य कार्यकर्ताओं ने पुलिस के सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए लोकभवन के गेट तक पंहुचने का प्रयास किया, जबकि हरीश रावत भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे।
पुलिस प्रशासन ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए कड़ी कार्रवाई की। जब प्रदर्शनकारी लोकभवन की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उनका रास्ता रोका और हरक सिंह रावत समेत कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया गया। इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंकिता भंडारी का मामला अब केवल एक आपराधिक हत्याकांड नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य और केंद्र सरकार के फैसलों पर सवाल उठाने का एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभर रहा है।
यह घटनाक्रम 19 वर्षीय पौड़ी जिले की रहने वाली अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हुई हत्या के बाद आए नए मोड़ का हिस्सा है, जिसमें वह ऋषिकेश के पास एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थी। अदालत ने इस मामले में तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा तो सुना दी है, लेकिन साथ ही ‘VIP’ की भूमिका को लेकर सामने आ रहे सवालों ने इस प्रकरण को फिर से चर्चा का केंद्र बना दिया है। अंकिता के माता-पिता के अनुसार, उनकी आशंकाओं का समाधान केवल तभी संभव है जब मामले की गहराई से जांच की जाए। दिल्ली से लेकर देहरादून तक फैले इन प्रदर्शनों ने यह साबित कर दिया है कि अंकिता का मामला अब एक समानांतर राजनीतिक बहस में बदल चुका है, जिसमें न्याय की मांग और राजनीतिक जिम्मेदारी का मुद्दा आपस में गुत्था है।
