उत्तराखंड में उपभोक्ता अधिकारों को सशक्त करने और बाजार में मिलावटी व नकली सामान पर रोकथाम के लिए एक नया कदम उठाया गया है। राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की राज्य स्तरीय समिति की बैठक में ‘BIS CARE App’ के व्यापक प्रचार‑प्रसार का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी खरीद से लेकर आम जनता के रोज़मर्रा के लेन‑देनों तक गुणवत्ता मानकों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस दिशा‑निर्देश के बाद, अब हर नागरिक अपने स्मार्टफ़ोन पर इस एप्लिकेशन को खोलकर खरीदे गए वस्तु की प्रामाणिकता की त्वरित जाँच कर सकता है, जिससे लैब‑जाँच की झंझट और समय दोनों बचेंगे।
‘BIS CARE App’ को डिजिटल रक्षा कवच कहा जा रहा है क्योंकि यह कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है। उपयोगकर्ता किसी भी उत्पाद पर लगे ISI मार्क या लाइसेंस नंबर को डालते ही यह पता कर सकता है कि वह मार्क असली है या नकली। इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं—जैसे मोबाइल, चार्जर, टीवी—के लिए R‑नंबर की जाँच से यह सुनिश्चित होता है कि वह BIS‑रजिस्टर्ड है। सोने के आभूषणों में उत्कीर्ण HUID नंबर को एंटर करने पर ज्वेलरी की शुद्धता और विक्रेता की जानकारी तुरंत मिलती है। साथ ही, यदि कोई विक्रेता नकली ISI मार्क वाला सामान बेचे, तो उपभोक्ता सीधे ऐप के माध्यम से BIS को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकता है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।
मुख्य सचिव बर्द्धन ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी प्रोक्योरमेंट में BIS मानकों का शत‑प्रतिशत पालन अनिवार्य हो। उन्होंने BIS को विभिन्न विभागों के साथ मिलकर कार्यशालाओं का आयोजन करने और एक विशेष एडवाइजरी जारी करने का आदेश दिया, ताकि सरकारी मशीनरी और अन्य वस्तुएँ केवल वही हों जो गुणवत्ता की कसौटी पर खरे उतरें। गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (QCO) को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए निरंतर क्षमता निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके अलावा, मुख्य सचिव ने VAB इंडस्ट्री और ट्रेडर्स एसोसिएशन के साथ सहयोग कर राज्य भर में कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने का निर्देश दिया। इन सत्रों में BIS के विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे, जिससे सरकारी कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों को नियमों की व्यावहारिक समझ मिल सके। जिलाधिकारियों, विभागीय सचिवों और अन्य प्रासंगिक स्टेकहोल्डरों के साथ नियमित संवाद और प्रेजेंटेशन के माध्यम से हर जिले में गुणवत्ता मानकों का सुदृढ़ पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इस समग्र पहल से न केवल उपभोक्ता सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि उत्तराखंड के बाजार में असली‑नकली की पहचान करना सच‑मुच एक क्लिक में संभव हो जाएगा।
Original Title: असली और नकली सामान की पहचान करना हुआ आसान, एक क्लिक में करें परख
Original Content: अब बाजार से खरीदारी करते समय असली और नकली की पहचान करना बेहद आसान हो जाएगा। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आम जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और मिलावटी व नकली सामानों पर लगाम कसने के लिए ‘BIS CARE App’ के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं। सचिवालय में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की राज्य स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने साफ कहा कि सरकारी खरीद से लेकर आम उपभोक्ता के बाजार तक गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
BIS CARE ऐप में क्या है खास?
‘BIS CARE App’ आम लोगों के लिए एक तरह से डिजिटल रक्षा कवच है। जब भी आप बाजार से कोई सामान खरीदते हैं, तो उसकी शुद्धता जांचने के लिए अब किसी लैब जाने की जरूरत नहीं है। बस अपने स्मार्टफोन में बीआईएस केयर ऐप खोलें और यह जानकारी तुरंत हासिल करें:
ISI मार्क और लाइसेंस नंबर: किसी उत्पाद पर बना आईएसआई मार्क असली है या फर्जी, इसकी तुरंत पुष्टि होती है।
इलेक्ट्रॉनिक सामान का R-नंबर: मोबाइल, चार्जर या टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान असली बीआईएस रजिस्टर्ड हैं या नहीं, यह जाना जा सकता है।
सोने की शुद्धता (HUID नंबर): सोने के आभूषण खरीदते समय उस पर छपे HUID नंबर को ऐप में डालते ही ज्वेलरी की पूरी शुद्धता और विक्रेता का विवरण आ जाता है।
सीधे शिकायत दर्ज करने की सुविधा: यदि कोई दुकानदार नकली आईएसआई मार्क का सामान बेच रहा है या मानकों का उल्लंघन कर रहा है, तो उपभोक्ता इस ऐप के जरिए सीधे बीआईएस को ऑनलाइन शिकायत भेज सकते हैं।
सरकारी खरीद में गुणवत्ता से नहीं होगा कोई समझौता
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य के सभी विभागों में जब भी सरकारी खरीद (प्रोक्योरमेंट) की जाए, तो निर्धारित प्रोक्योरमेंट नियमों के साथ-साथ बीआईएस मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो को निर्देश दिए कि वे विभिन्न विभागों के साथ मिलकर कार्यशालाएं (वर्कशॉप) आयोजित करें और एक विशेष एडवाइजरी जारी करें, ताकि सरकारी मशीनरी में सिर्फ वही सामान पहुंचे जो गुणवत्ता की कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरता हो।
गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (Quality Control Orders) को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए मुख्य सचिव ने क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) को एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बताया। उन्होंने बीआईएस से कहा कि वब इंडस्ट्री और ट्रेडर्स एसोसिएशन के साथ कार्यशालाएं आयोजित कर उन्हें नए नियमों और मानकों की जानकारी दी जाए।सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियमित ट्रेनिंग सेशन रखे जाएं, जिनमें बीआईएस के विशेषज्ञ मौजूद रहकर नियमों की व्यावहारिक जानकारी दें। सभी संबंधित विभागों के सचिवों और जिलाधिकारियों (DMs) के साथ नियमित संवाद और प्रेजेंटेशन दिए जाएं, जिससे हर जिले में गुणवत्ता मानकों का प्रभावी पालन हो सके।
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