उत्तराखंड की राजनीतिक परिदृश्य में नया मोड़ आते हुए, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशों और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आह्वान पर राज्य भर में सियासत गरमाने जा रही है। 2 अक्टूबर, जिसे गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है, से लेकर 8 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ का आयोजन किया जाएगा। यह पहल केवल एक सामान्य पार्टी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसका मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मतदाता सूची (SIR) से जुड़े मुद्दों पर सवाल खड़े करना है। पार्टी का दावा है कि इस सप्ताह के अंतिम चरण में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ इंडिया गठबंधन के प्रतिनिधि भी एकजुट होकर इस अभियान में शामिल होंगे, जिससे राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
संस्थागत स्तर पर इस अभियान को अत्यंत सख्ती से लिया गया है। प्रदेश कांग्रेस ने सभी जिला और महानगर कमेटियों को शांतिपूर्ण और समन्वित तरीके से कार्यक्रमों की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है, जिसमें सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। रणनीति के तहत, जिला और महानगर स्तर पर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ संयुक्त बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनके तुरंत बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनता के सामने कार्यक्रम की रूपरेखा और प्रमुख राजनीतिक मुद्दे रखे जाएंगे। इस प्रक्रिया में प्रदेश से लेकर जिला स्तर के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की अनिवार्य उपस्थिति निर्धारित की गई है, जो यह दर्शाता है कि पार्टी इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है।
संगठन मजबूती के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संगठन) राजेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि जिला स्तर पर ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ मार्च निकाले जाएंगे। इन मार्चों के माध्यम से कार्यकर्ता केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे। डिजिटल युग के अनुरूप, प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी सोशल मीडिया विभाग को सौंपी गई है, जबकि जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए ब्लॉक स्तर पर भी इंडिया गठबंधन के घटक दलों के साथ बैठकें होंगी। इन बैठकों में मार्च की रणनीति और कार्यकर्ताओं के सक्रिय जुटान के प्रबंधन को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि हर मोर्चे पर पार्टी की पकड़ दृढ़ बनी रहे।
कार्यक्रम के दौरान निकलने वाले मार्चों का मार्ग भी राजनीतिक संकेतों से भरा हुआ होगा। स्थानीय स्तर पर तय मार्गों से होते हुए ये मार्च डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा, महात्मा गांधी की प्रतिमा या जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय तक जाएंगे। मार्च के समापन पर राष्ट्रगान के बाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 का सार्वजनिक वाचन किया जाएगा, जो वयस्क मताधिकार के अधिकार के संवैधानिक आधार को रेखांकित करता है। इस पार्श्वभूमि में, कांग्रेस निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करेगी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा उन्हें पद से हटाने की मांग को प्रमुखता से उठाएगी, जिससे आगामी दिनों में राजनीतिक संघर्ष तीव्र होने की संभावना जताई जा रही है।
