📅 Friday, 02 October 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
⚡ ब्रेकिंग न्यूज़
🔴 देहरादून में 2 अक्टूबर से शुरू हो रहा ‘डिपार्टमेंट क्रिकेट लीग’‑में 18 टीमें, सांस्कृतिक झलक और लाखों की इनाम राशि 🔴 शारदा रिवरफ्रंट कॉरिडोर में धीमी प्रगति पर मुख्य सचिव का कड़ा रुख 🔴 उत्तराखंड में फार्मेसी प्रवेश पर कड़ी कार्रवाई, छात्र अब हाई कोर्ट से सहायता मांगते 🔴 उत्तराखंड की आवाज़: विधानसभा चुनाव से पहले ‘जन घोषणा पत्र’ जारी करने का ऐलान, देहरादून में हुआ ऐतिहासिक जनसंवाद 🔴 कैंची धाम में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन पर PCB ने सख्त रुख अपनाया, तीन होटलों को नोटिस 🔴 उत्तराखंड के बुजुर्गों के लिए सीएम धामी का ऐतिहासिक संकल्प: 147 करोड़ की पेंशन का ट्रांसफर, दिव्यांगों के लिए कोचिंग और ‘वृद्धाश्रम मुक्त’ समाज की सख्त मांग
होम » खबरनामा » उत्तराखंड में फार्मेसी प्रवेश पर कड़ी कार्रवाई, छात्र अब हाई कोर्ट से सहायता मांगते

उत्तराखंड में फार्मेसी प्रवेश पर कड़ी कार्रवाई, छात्र अब हाई कोर्ट से सहायता मांगते

उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने हाल ही में राज्य के सभी फार्मेसी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और पॉलीटेक्निक संस्थानों को एक सख्त निर्देश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि दाखिले के दौरान छात्रों की मार्कशीट की गहन जाँच अनिवार्य है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि कई संस्थानों ने नियमों की अनदेखी करते हुए उन छात्रों को प्रवेश दिया है जो विज्ञान के अनिवार्य विषयों में फेल हो चुके हैं। परिणामस्वरूप, दो या चार साल की पढ़ाई और भारी फीस चुकाने के बाद भी छात्र फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। इस स्थिति से तंग आकर कई पीड़ित अभ्यर्थियों ने माननीय उच्च न्यायालय के दरवाजे पर दस्तक देना शुरू कर दिया है।

काउंसिल के रजिस्ट्रार के.एस. फरस्वाण ने बताया कि पहले भी सभी संस्थानों को पत्राचार और समाचार पत्रों के माध्यम से चेतावनी दी जा चुकी है। इस बार, 2026 के सत्र में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की अंकतालिकाओं की जाँच पर पुनः जोर दिया गया है। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश के समय की गई लापरवाही भविष्य में पंजीकरण के समय विवाद का कारण बन सकती है और छात्रों के करियर को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसलिए सभी संस्थानों को यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है।

वर्तमान में उत्तराखंड में 96 कॉलेज, 24 विश्वविद्यालय और 21 पॉलीटेक्निक संस्थान D.Pharm (2 वर्ष), B.Pharm (4 वर्ष), Pharm D (6 वर्ष) और M.Pharm (2 वर्ष) जैसे पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। फार्मेसी एक्ट 1948 के एजुकेशन रेगुलेशन 2020 के अनुसार, इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए छात्र का इंटरमीडिएट (12वीं) में विज्ञान स्ट्रीम से पास होना अनिवार्य है, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स या बायोलॉजी में से किसी एक ग्रुप में उत्तीर्ण होना ज़रूरी है। B.Pharm के लिए अतिरिक्त शर्त है कि अभ्यर्थी विज्ञान स्ट्रीम के अनिवार्य विषयों के साथ अंग्रेजी विषय में भी पास हो।

काउंसिल के इस सख्त कदम का उद्देश्य है कि छात्रों को सही योग्यता के साथ ही प्रवेश मिले और भविष्य में पंजीकरण के दौरान अनावश्यक विवादों से बचा जा सके। यह स्पष्ट संदेश है कि कोई भी संस्था नियमों की उपेक्षा नहीं कर सकती, नहीं तो काउंसिल के कड़ी रुख का सामना करना पड़ेगा।

Original Title: उत्तराखंड में मार्कशीट जांचे बिना हो रहे फार्मेसी में दाखिले, छात्रों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा

Original Content: उत्तराखंड में इंटर की मार्कशीच जांचे बिना ही दाखिले हो रहे हैं। फार्मेसी काउंसिल के फार्मेसी कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों और शिक्षण संस्थानों के लिए दिए गए एक अलर्ट से यह खुलासा हुआ है। उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने राज्य के सभी फार्मेसी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और पॉलीटेक्निक संस्थानों को दाखिले के दौरान अभ्यर्थियों की मार्कशीट की गहन जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। काउंसिल ने चेतावनी दी है कि बिना तय पात्रता के प्रवेश देने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा।

क्या हैं काउंसिल के नियम और पात्रता?

मौजूदा समय में में प्रदेश के 96 कॉलेजों, 24 यूनिवर्सिटीज और 21 पॉलीटेक्निक संस्थानों में डी.फार्म (2 वर्ष), बी.फार्म (4 वर्ष), फार्म डी (6 वर्ष) और एम.फार्म (2 वर्ष) जैसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। फार्मेसी एक्ट 1948 के एजुकेशन रेगुलेशन 2020 के अनुसार, इन कोर्सेस में एडमिशन के लिए छात्र का इंटरमीडिएट (12वीं) में साइंस स्ट्रीम से पास होना अनिवार्य है: फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स या बायॉलोजी में से किसी एक ग्रुप में उत्तीर्ण होना ज़रूरी है। बी.फार्मा के लिए विशेष शर्त है कि अभ्यर्थी साइंस स्ट्रीम के अनिवार्य विषयों के साथ अंग्रेजी विषय में पास हो।

लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे छात्र

काउंसिल के ध्यान में आया है कि कई संस्थान नियमों की अनदेखी कर ऐसे छात्रों को दाखिला दे देते हैं जो साइंस के किसी एक अनिवार्य विषय में अनुत्तीर्ण (फेल) होते हैं। दो या चार साल की पढ़ाई और भारी-भरकम फीस खर्च करने के बाद जब अभ्यर्थी काउंसिल में फार्मासिस्ट के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि वे इसके लिए पात्र ही नहीं थे। इसके कारण काउंसिल को अभ्यर्थियों के आक्रोश का सामना करना पड़ता है और छात्रों का कीमती समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। इस स्थिति से तंग आकर कई पीड़ित अभ्यर्थियों ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है।

वर्ष 2026 के दाखिलों को लेकर दी अंतिम चेतावनी

उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार के.एस. फरस्वाण ने बताया कि इससे पूर्व भी सभी संस्थानों को पत्राचार और समाचार पत्रों के माध्यम से चेतावनी दी जा चुकी है। काउंसिल ने सत्र 2026 में प्रवेश ले रहे अभ्यर्थियों की अंकतालिकाओं की भली-भांति जांच करने के पुन: निर्देश दिए हैं। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश के समय की गई ज़रा सी लापरवाही भविष्य में रजिस्ट्रेशन के समय विवाद की वजह बनेगी और छात्रों के करियर को गर्त में धकेल देगी। इसलिए सभी संस्थान एडमिशन देने से पहले नियमों की पूरी कड़ाई से पालना सुनिश्चित करें। Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

संबंधित समाचार (Related News)