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उत्तराखंड में नई दिशा: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मांगी परियोजनाओं की ‘जीवन-परिणाम’ की समीक्षा, केवल बजट खर्च पर नहीं बल्कि जनकल्याण पर होगी नजर

उत्तराखंड सरकार की कार्यप्रणाली में एक महत्वपूर्ण पाल्टर (U-turn) जारी है, जहां अब सरकारी योजनाओं की सफलता का मापदंड केवल कागजी कार्रवाई या बजटीय खर्च नहीं, बल्कि आम नागरिक की जेब में आने वाली असली वृद्धि और जीवनस्तर में सुधार तय करेगा। बुधवार को टाउन हॉल में आयोजित 25-बिंदु कार्यक्रम की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे ‘फाइल-आधारित प्रगति’ से आगे बढ़कर ‘भूमि-आधारित प्रभाव’ (ground-level impact) की गहन जांच करें। मुख्य सचिव ने समीक्षा के दौरान यह तर्क पेश किया कि किसी भी सरकारी स्कीम की वास्तविक कामयाबी तभी समझी जा सकती है जब यह प्रमाणित हो सके कि उससे लाभार्थी की आमदनी में कितना निरंतर इज़ाफ़ा हुआ और उनके रोज़मर्रा के जीवन में कितना सुधार आया। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अब केवल फीता काटने या बजट खर्च करने के आंकड़ों को प्रदर्शित करने की दिनचर्या का अंत हो चुका है।

बैठक के दौरान, मुख्य सचिव ने विशेष रूप से पिरूल (चीड़ की पत्तियों) संग्रहण कार्यक्रम के आर्थिक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एक विस्तृत और पारदर्शी डेटा तैयार करें, जिसमें यह स्पष्ट हो कि अब तक पिरूल इकट्ठा करने वाले लोगों के बैंक खातों में कुल कितनी राशि जमा हुई है, कितने परिवारों को इससे स्थिर आय का स्रोत मिला है और उनकी कुल आय में कितना प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है। यह पहल राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने और स्थानीय उत्पादन के माध्यम से जनकल्याण को सुनिश्चित करने के प्रयासों को नई गति देती है।

शहरी सफाई और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में भी कड़ी निगरानी के निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्य सचिव ने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और कूड़े की सही फ़िल्ट्रेशन (segregation) व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर दिया, जिसके लिए रोज़ाना के निरीक्षण की मांग की गई है। साथ ही, राज्य के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) की रियल-टाइम निगरानी के लिए एक केंद्रीय मॉनिटरिंग मैकेनिज्म तैयार करने का निर्देश पेयजल विभाग और जिलाधिकारियों को दिया गया। इस प्रणाली से यह पता चल सकेगा कि क्या प्लांट्स अपनी अधिकतम क्षमता पर चल रहे हैं और क्या वे निर्धारित साफ-सफाई मानकों का पालन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बड़े होटलों, रेस्तरां और ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में स्वयं के STP स्थापित करने के नियमों की कड़ी निगरानी के लिए जिम्मेदार बनाया गया है।

अतिक्रमण मुक्त करने की प्रक्रिया को भी नया आयाम दिया गया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि केवल बुल्डोज़र चलाकर अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं है; बल्कि यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि उसी स्थान पर दोबारा कब्ज़ा न हो। इसके लिए जिला स्तर पर रोज़ाना चौकसी की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, राज्य के विभिन्न जिलों में अटकी हुई पार्किंग योजनाओं को तेजी से अंजाम दिलाने और बाधाओं को हटाने पर भी बल दिया गया।

व्यावहारिक कार्रवाई के लिए, मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिया कि वे हर महीने अपने-अपने जिलों में 25-बिंदु कार्यक्रम की समीक्षा बैठक स्वयं आयोजित करें। इस बैठक का उद्देश्य केवल आंकड़ों की गिनती नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई, लोगों को मिल रहे सीधे लाभ और सामने आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण होगा। जिन क्षेत्रों में कार्यवाही धीमी पाई जाएगी, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। इस अहम बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, श्री युगल किशोर पंत, श्री धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव रीना जोशी, मनुज गोयल, रोहित मीणा, नवनीत पाण्डेय समेत विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जो राज्य प्रशासन में इस बदलाव की गंभीरता को दर्शाता है।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

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