कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में मंगलौर विधायक काज़ी निजामुद्दीन ने पत्रकार वार्ता के दौरान चुनाव प्रक्रियाओं, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग चुनावों में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर लोगों के बीच संदेह पैदा हो रहा है। निजामुद्दीन का कहना है कि लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जनता के विश्वास की बुनियाद हैं, और यदि मतदाता सूचियों में विसंगतियाँ और लक्षित नाम कटने के मामले हैं तो चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से चुनाव प्रक्रिया और SIR को लेकर तथ्यों के आधार पर उठाए गए सवालों को भी उद्धृत किया, और दावा किया कि मीडिया में भी इन मुद्दों पर चर्चा हुई है।
निजामुद्दीन ने ग्राम प्रधान चुनाव के उदाहरण के रूप में हरिद्वार के नारसन ब्लॉक स्थित ग्राम नाथूनखेड़ी का उल्लेख किया। वहाँ सुशील कुमार नाम के व्यक्ति ने ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा और कथित तौर पर 22 वोटों से जीत हासिल की। इसके बाद आठ बार रिकाउंटिंग कराई गई और आठवीं बार में उन्हें एक वोट से हारने वाला घोषित किया गया। यह घटना “मतदाताओं के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता” से जुड़ी एक गंभीर विषय के रूप में सामने आई।
विधायक ने मंगलौर नगर पालिका के मामले को भी उठाया। उन्होंने बताया कि चौधरी इस्लाम पहले निर्विरोध पार्षद चुने गए और बाद में नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी जीते। फिर उन्होंने पार्षद के रूप में फिर से नामांकन किया, पर नामांकन के दौरान शिकायत की गई और नजूल भूमि पर कब्जे का आरोप लगाकर नामांकन निरस्त कर दिया गया। निजामुद्दीन ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या बिना पर्याप्त जांच और सुनवाई के नामांकन रद्द किया गया।
सहकारिता और छात्रसंघ चुनावों पर भी सवाल उठाए गए। सहकारिता चुनाव की परिसीमन प्रक्रिया में बदलाव और 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने की बात पर स्पष्टीकरण की माँग की गई। ड.ए.वी. कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में विनीत भट्ट के खिलाफ जारी गैर‑जमानती वारंट और गिरफ्तारी को चुनाव प्रक्रिया से जोड़कर सवाल उठाए गए, और पूछा गया कि यदि मुकदमा था तो गिरफ्तारी चुनाव के दौरान ही क्यों हुई।
अंत में, काज़ी निजामुद्दीन ने SIR के प्रति अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मतदाताओं के नाम हटने और उनके अधिकार प्रभावित होने की चिंता है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्वाचन आयोग के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जानी है। आयोग की वेबसाइट पर SIR‑2026 के तहत ड्राफ्ट रोल, ASD सूची और अन्य संबंधित जानकारी उपलब्ध है।
Original Title: काज़ी निजामुद्दीन का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- हर स्तर पर उठ रहे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
Original Content: कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में मंगलौर विधायक काज़ी निजामुद्दीन ने पत्रकार वार्ता कर आगामी चुनाव प्रक्रियाओं, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग चुनावों में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की शिकायतें सामने आ रही हैं और इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर लोगों के बीच सवाल खड़े हो रहे हैं।
काज़ी निजामुद्दीन का चुनाव आयोग पर हमला
काज़ी निजामुद्दीन ने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जनता के विश्वास की बुनियाद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान विसंगतियां सामने आ रही हैं और कुछ स्थानों पर लक्षित तरीके से नाम काटे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। विधायक ने कहा कि राहुल गांधी की ओर से चुनाव प्रक्रिया और SIR को लेकर तथ्यों के आधार पर सवाल उठाए गए हैं। निजामुद्दीन ने दावा किया कि मीडिया में भी इन मुद्दों को लेकर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार ग्राम पंचायत से लेकर नगर निकाय, सहकारिता और छात्रसंघ चुनाव तक अलग-अलग स्तरों पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल सामने आए हैं।
ग्राम प्रधान चुनाव में आठ बार मतगणना का दावा
काज़ी निजामुद्दीन ने हरिद्वार के नारसन ब्लॉक स्थित ग्राम नाथूनखेड़ी का उदाहरण देते हुए कहा कि सुशील कुमार नाम के व्यक्ति ने ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा और कथित तौर पर 22 वोटों से जीत हासिल की। उनके अनुसार इसके बाद आठ बार रिकाउंटिंग कराई गई और आठवीं बार में उन्हें एक वोट से हारा हुआ घोषित कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसा हुआ है तो यह मतदाताओं के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय है।
मंगलौर नगर निकाय चुनाव का भी किया जिक्र
उन्होंने मंगलौर नगर पालिका से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया। निजामुद्दीन के मुताबिक चौधरी इस्लाम पहले निर्विरोध पार्षद चुने गए और बाद में नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी जीते। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में जब उन्होंने फिर पार्षद का चुनाव लड़ा तो नामांकन के दौरान उनके खिलाफ शिकायत की गई और नजूल भूमि पर कब्जे का आरोप लगाकर नामांकन निरस्त कर दिया गया। कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि इस मामले में बिना पर्याप्त जांच और सुनवाई का अवसर दिए नामांकन रद्द किए जाने पर सवाल उठे। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित निर्वाचन अधिकारियों या अन्य पक्ष का पक्ष पत्रकार वार्ता में सामने नहीं आया।
सहकारिता और छात्रसंघ चुनाव का भी उठाया मुद्दा
निजामुद्दीन ने सहकारिता चुनाव की परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन को पहले अधिसूचित किया गया और बाद में उसमें बदलाव कर नए परिसीमन के आधार पर चुनाव कराया गया। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया करीब 15 दिनों के भीतर होने का दावा किया जा रहा है, जिस पर स्पष्टीकरण जरूरी है। डीएवी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कांग्रेस नेता और छात्र नेता विनीत भट्ट के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट और गिरफ्तारी को चुनाव प्रक्रिया से जोड़कर सवाल उठाए।
विधायक ने कहा कि यदि विनीत भट्ट के खिलाफ कोई मुकदमा था तो उनकी गिरफ्तारी चुनाव के दौरान ही क्यों हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी मुकदमे का समर्थन नहीं कर रही है, बल्कि गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठा रही है। बताते चलें हाल ही में डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव से पहले विनीत भट्ट के खिलाफ NBW को लेकर कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ताओं ने एसएसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था।
SIR को लेकर भी जताई चिंता
SIR की प्रक्रिया को लेकर काज़ी निजामुद्दीन ने कहा कि कांग्रेस को मतदाताओं के नाम हटने और उनके अधिकार प्रभावित होने की चिंता है। उन्होंने कहा कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले हर पात्र मतदाता का नाम सुनिश्चित किया जाना चाहिए। विधायक ने कहा उत्तराखंड में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्वाचन आयोग के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जानी है। आयोग की वेबसाइट पर SIR-2026 के तहत ड्राफ्ट रोल, ASD सूची और अन्य संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
