📅 Sunday, 27 September 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
⚡ ब्रेकिंग न्यूज़
🔴 बनबसा में पहली बार कैबिनेट बैठक: मुख्यमंत्री धामी की रणनीतिक चाल 🔴 नैनिताल में विजिलेंस का तेज़ कार्रवाई: 30 हज़ार की रिश्वत लेते पटवारी को रंगे‑हाथ गिरफ्तार 🔴 उत्कट विरोध: उत्तराखंड कांग्रेस ने ‘सेवा से संकल्प’ कार्यक्रम पर राजनीतिक दबाव की रोक का आह्वान 🔴 राज्यपाल ने संस्कृत को भविष्य की दिशा में ले जाने का किया आह्वान, AI‑संकल्पित नई संभावनाओं पर दिया ज़ोर 🔴 कुमाऊँ मंडल में सरकारी प्रमाण‑पत्रों की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: दीपक रावत के कड़े निर्देशों के बाद नई राह 🔴 कुमाऊँ मंडल में भूमि‑परिवर्तन प्रमाण‑पत्रों की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: मंडलायुक्त दीपक रावत ने दिया कड़ा निर्देश
होम » खबरनामा » राज्यपाल ने संस्कृत को भविष्य की दिशा में ले जाने का किया आह्वान, AI‑संकल्पित नई संभावनाओं पर दिया ज़ोर

राज्यपाल ने संस्कृत को भविष्य की दिशा में ले जाने का किया आह्वान, AI‑संकल्पित नई संभावनाओं पर दिया ज़ोर

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने शनिवार को हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के बारहवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संस्कृत में संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कृत को केवल अतीत की धरोहर के रूप में संजो कर रखना पर्याप्त नहीं, बल्कि इसे आधुनिक तकनीकी परिदृश्य—विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, भाषा‑विज्ञान और मशीन लर्निंग—से जोड़ना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना और समृद्ध साहित्य पर आधारित शोध के अपार अवसर आज के डिजिटल युग में नई खोजों की कुंजी बन सकते हैं, और इस भाषा को पुस्तकालयों की अलमारियों से बाहर निकालकर डिजिटल संसार, प्रयोगशालाओं और वैश्विक ज्ञान‑विमर्श में लाना आवश्यक है।

समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, तथा उन्हें उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। राज्यपाल ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को पाँच संकल्प लेने का आग्रह किया, जिससे वे अपने शैक्षणिक और सामाजिक जीवन में संस्कृत को एक सशक्त साधन के रूप में उपयोग कर सकें। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग और भारतीय दर्शन सहित सम्पूर्ण ज्ञान‑परम्परा का वाहक है, जो जीवन को सही दृष्टिकोण, विवेक और मानव कल्याण की भावना से देखना सिखाती है।

उद्योग‑जॉब के नए द्वार खोलने के संदर्भ में राज्यपाल ने बताया कि अब संस्कृत के छात्रों के लिए केवल अध्यापन ही नहीं, बल्कि अनुवाद, शोध, डिजिटल मीडिया, भाषा‑तकनीक, प्रकाशन और भारतीय संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। इस दिशा में शिक्षा को सीधे रोजगार, नवाचार और तकनीकी विकास से जोड़ना समय की मांग है।

समारोह में पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल, डॉ. अनुसूया प्रसाद पंत, प्रो. राम कुमार शर्मा, श्री लाल बहादुर शास्त्री और राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया। साथ ही, पद्मश्री अभिराज राजेन्द्र मिश्र ने लगभग दस हजार दुर्लभ पुस्तकें एवं पत्रिकाएँ विश्वविद्यालय को दान कीं, जिन्हें ‘अभिराज‑पुस्तक‑वीथी’ के रूप में संरक्षित किया जाएगा, जिससे भविष्य की पीढ़ियों को अमूल्य ज्ञान‑संपदा प्राप्त होगी।

Original Title: राज्यपाल ने संस्कृत में दिया भाषण, भाषा को AI से जोड़ने पर दिया जोर

Original Content: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने शनिवार को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि विद्यार्थियों को संस्कृत में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल अतीत की धरोहर के रूप में सहेज कर रखना ही पर्याप्त नहीं है। बल्कि इसे भविष्य की संभावनाओं और आधुनिक दौर से जोड़ना होगा।

[उर्वरित मूल पाठ]

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।