उत्तराखंड के पशुपालन विभाग पर लंपी त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease) के बढ़ते खतरे का गहरा असर पड़ा है। अब तक प्रदेश के सात जिलों—देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग और टिहरी—में 600 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं। जांच के लिए 269 नमूने बरेली भेजे गये, जिनमें से 55 रिपोर्टों में 21 नमूनों में संक्रमण की पुष्टि हुई।
नैनीताल में एक बछड़े की मृत्यु की घटना ने विभाग की चेतावनी को और तेज़ कर दिया है। लंपी रोग, जो मुख्यतः गाय और भैंसों को प्रभावित करता है, बुखार और त्वचा पर गांठों के रूप में प्रकट होता है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, यह वायरस मुख्यतः कीटों और अन्य वाहकों के माध्यम से फैलता है, और सामान्यतः इसकी मृत्यु दर कम होती है।
रोग के प्रसार को रोकने के लिए जुलाई 2026 से उत्तराखंड सहित कई राज्यों में नियंत्रण उपाय लागू किये गए हैं। पशुओं की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण, संक्रमित पशुओं का अलगाव, साफ-सफाई और कीट नियंत्रण के साथ-साथ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। हालिया विभागीय आँकड़ों के अनुसार, 2 लाख 10 हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण कर लिया गया है।
पशुपालन विभाग ने अलर्ट मोड जारी कर दिया है और क्षेत्रीय अधिकारियों को निगरानी तथा रोकथाम के उपायों को तेज करने का निर्देश दिया है। यह कदम लंपी त्वचा रोग के प्रसार को रोकने और पशुधन के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।
Original Title: उत्तराखंड में लंपी का बढ़ता खतरा, 7 जिलों में दस्तक अलर्ट मोड पर विभाग Lumpy Skin Disease
Original Content: Lumpy Skin Disease: उत्तराखंड में पशुओं में फैलने वाले लंपी त्वचा रोग ने पशुपालन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के सात जिलों में अब तक 600 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं। जांच के लिए भेजे गए नमूनों में संक्रमण की पुष्टि भी हुई है। नैनीताल में एक बछड़े की मौत के बाद विभाग ने निगरानी और रोकथाम के उपाय तेज कर दिए हैं।
