देहरादून पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) ने NEET UG 2025 के चयन प्रक्रिया में हुए एक बड़े धोखे की उजागर करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में, फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर तीन अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेजों में MBBS के लिए दाखिला दिलाने का प्रयास किया गया। पुलिस के अनुसार, यह घटना तब प्रकाश में आई जब थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए, लेकिन जांच में लगाए गए दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं और जालीयत सामने आई। इसके बाद, पुलिस ने संबंधित थानों में क्रमशः मुकदमा संख्या 380/26 और 86/26 दर्ज कर केस की गहराई से जांच शुरू की।
इस घटना की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एक SIT गठित की गई, जिसने संबंधित शिक्षण संस्थानों से दस्तावेज जब्त कर सत्यापन प्रक्रिया शुरू की। जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों के दस्तावेजों पर दर्ज पते गलत थे, जो धोखे की ओर संकेत करते थे। SIT की कड़ी कोशिशों के बाद, रूपेश पंडित (30, निवासी मेरठ) और अरविंद कुमार (निवासी हरिद्वार) को पूछताछ के लिए बुलाया गया। पूछताछ के दौरान सामने आए ठोस साक्ष्यों के आधार पर, पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। रूपेश पंडित को पिछले पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम करने का अनुभव था, जहां वह ‘MECODO पाठशाला’ के नाम से विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में MBBS, BTech, BCA, BBA और BCom जैसे पाठ्यक्रमों में कमीशन पर आधारित दाखिला दिलाने का कारोबार कर रहा था।
पूछताछ के दौरान खुले तथ्यों के अनुसार, अरविंद कुमार रूपेश का पुराना परिचित था, जिसने अपनी बेटी परी को MBBS में दाखिला दिलाने के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इस रिश्ते के जरिए दो अन्य परिचितों के बच्चों को भी शामिल किया गया। आरोपियों ने तीनों अभ्यर्थियों को फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे का दावा करते हुए MBBS में दाखिला दिलाने की बात कही और प्रत्येक दाखिले के लिए 45 लाख रुपये की भारी रकम तय की। पुलिस के मुताबिक, इस धोखे के तहत तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये का एडवांस लिया गया, शेष रकम दाखिले के बाद और कक्षाएं शुरू होने के बाद चुकानी थी।
SIT के अनुसार, रूपेश पंडित ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार करवाए और फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए, जिनके आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लिया। यह मामला न केवल एजुकेशन कंसल्टेंट्स द्वारा किए जा रहे धोखे को प्रकाश में लाता है, बल्कि सरकारी कोटों के दुरुपयोग की गंभीरता को भी उजागर करता है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य शख्सों की भूमिका और धन प्रवाह की पड़ताल कर रही है, ताकि इस संस्थागत धोखे के सभी जेबॉजों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जा सके।
