उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में कांग्रेस ने न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि 8 सितंबर को उत्तराखंड हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था, लेकिन 11 सितंबर को गणेश जोशी ने मीडिया के सामने उनके पक्ष में फैसला आने का दावा किया। वहीं 15 सितंबर के हाईकोर्ट आदेश में मामले को दूसरी पीठ के समक्ष रखे जाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया।
कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जब अदालत की ओर से फैसला सार्वजनिक रूप से सुनाया ही नहीं गया था, तो 11 सितंबर को मंत्री को कथित फैसले की जानकारी कैसे मिली। पार्टी ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ राजनीतिक आरोप लगाने का मामला नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा से जुड़ा प्रश्न है। प्रदेश उपाध्यक्ष सुजाता पॉल ने कहा कि सरकार को पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से गणेश जोशी को मंत्री पद से हटाने की मांग भी की।
वहीं सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता सर्वोपरि है। उन्होंने पूरे मामले में सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। कांग्रेस के अधिवक्ता एवं प्रवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि 8 सितंबर को बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित था। इसके बाद 11 सितंबर को मंत्री की ओर से फैसले के संबंध में कथित बयान और 15 सितंबर को मामले को दूसरी पीठ के समक्ष रखने की प्रक्रिया शुरू होने के बीच की परिस्थितियों की जांच जरूरी है।
कांग्रेस ने मांग की कि 11 सितंबर को दिए गए कथित बयान और उसके आधार की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि निर्णय सार्वजनिक होने से पहले मंत्री को कथित जानकारी कैसे प्राप्त हुई। पार्टी ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से गणेश जोशी को मंत्री पद से हटाने और जांच पूरी होने तक उनके मंत्री पद पर बने रहने के संबंध में निर्णय लेने की मांग की है। कांग्रेस ने उनकी विधायक सदस्यता को लेकर भी सक्षम संवैधानिक प्राधिकारी से कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की। पार्टी ने कहा कि मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सक्षम न्यायालय द्वारा ही दिया जाएगा।
