कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर सरकार पर सरकारी जमीनें निजी हाथों में देने का आरोप लगाया

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उत्थान के दौरान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में, कांग्रेस ने पूरे उत्तराखंड में पत्रकार वार्ताएँ आयोजित कर सरकार पर सरकारी जमीनें और संपत्तियाँ निजी हाथों में देने के आरोप लगाए। देहरादून के महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने पत्रकार वार्ता के दौरान धामी सरकार पर तीव्र निशाना साधा और आरोप लगाया कि राज्य सरकार सरकारी भूमि को निम्न दरों पर निजी संस्थाओं को सौंपने की तैयारी में है।

कांग्रेस के अनुसार, रुद्रप्रयाग में लोक निर्माण विभाग के तीन महत्वपूर्ण निरीक्षण भवन—दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी—को सरकार औने-पौने दामों पर निजी हाथों में देने की योजना चल रही है। इन क्षेत्रों में सड़क, पहुँच मार्ग और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध होने के कारण इन संपत्तियों का महत्व अत्यधिक माना जाता है। इसी प्रकार, केदार घाटी की इन बेशकीमती जमीनों को भी निजी संस्थाओं को देने की तैयारी हो रही है।

डॉ. गोगी ने बताया कि राज्य सरकार उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (UIIDB) के माध्यम से प्रदेश की हजारों बीघा सरकारी जमीन और संपत्तियों को लंबी अवधि की लीज पर निजी हाथों में देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि नैनीताल के पटुवा डांगर में लगभग 14 एकड़ भूमि पर प्रीमियम रिज़ॉर्ट, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश के लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन को पीपीपी मोड के तहत होटल के रूप में विकसित करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं।

कांग्रेस ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब तक UIIDB को करीब 1200 एकड़ यानी छह हजार बीघा से अधिक सरकारी भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है, जबकि कई हजार बीघा भूमि से जुड़े प्रस्ताव अभी भी अनुमति के लिए लंबित हैं। पार्टी का कहना है कि लंबी अवधि की लीज के माध्यम से इन संपत्तियों को निजी हाथों में देने की व्यवस्था चल रही है।

इसके जवाब में कांग्रेस ने प्रदेशभर में आंदोलन करने की चेतावनी दी और घोषणा की कि रुद्रप्रयाग में जिला कांग्रेस कार्यकर्ता दुग्गल बिट्ठा, फाटा और गुप्तकाशी स्थित निरीक्षण भवनों पर रक्षा सूत्र बांधकर आंदोलन की शुरुआत करेंगे। पार्टी ने कहा कि केदार घाटी की इन संपत्तियों को निजी हाथों में जाने से रोकने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।

कांग्रेस की यह आलोचना उत्तराखंड सरकार के भूमि नीतियों पर सवाल उठाती है और आने वाले दिनों में क्षेत्र में राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना को दर्शाती है।