नैनीताल की ज्योलीकोट में जल संकट: 3 मौतें, 250 से अधिक बीमार, स्कूल टंकी में मिली गंदगी पर प्रशासन की कड़ी कार्रवाई

नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल की समस्या ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बना दिया है, जहां अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 250 से अधिक लोगों को बीमारियों ने घेर रखा है। इस आपदा ने न केवल स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव बनाया है, बल्कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी व्यवस्थाओं में क्रांतिकारी बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। दूषित पानी की आपूर्ति बंद होने के बाद, पहाड़ी इलाकों की भूगोलिक चुनौतियों को देखते हुए लोगों को सुरक्षित पेयजल तक पहुंचाना अब सबसे बड़ी जटिलता बनकर उभरा है। प्रशासन ने टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था की है, लेकिन कई दूरदराज के गांव मुख्य सड़क से इतने दूर हैं कि टैंकर का पानी हर घर तक पहुंचाना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीणों को डेढ़ से दो किलोमीटर दूर जाकर पानी भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी स्थिति निराशाजनक है, जहां ज्योलीकोट और आसपास के इलाकों में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। अस्पतालों में उपचार लेने वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे सर्विस सेंटरों में रेफर करना पड़ रहा है। तीन मौतों के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि स्थानीय अस्पताल 24 घंटे संचालित रहे और प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता पर विशेष निगरानी की जाए। जल संस्थान के अधिकारियों ने उन गांवों की पहचान की है जो मुख्य सड़क से दूर हैं, और अब इन स्थानों पर पाइपलाइन को बीच में काटकर टैंकर से सीधे जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीणों के पास तीन से चार दिनों के लिए सुरक्षित पानी का स्टॉक बना रहे, ताकि उन्हें बार-बार पानी के लिए दूर जाने की मजबूरी न पड़े।

इस घटनाक्रम में सेंट एंथोनीज कॉन्वेंट स्कूल की जल व्यवस्था पर भी प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए पानी की टंकी में मिली गंदगी का पर्दाफाश किया है। जल संस्थान की जांच में पाया गया कि स्कूल की टंकी में मिट्टी और अस्वच्छ पानी जमा है, जिसका कारण यह भी सामने आया कि विद्यालय ने जल संस्थान या जल निगम से मानक कनेक्शन न लेने के बजाय एक स्थानीय स्रोत से सीधे पाइपलाइन के जरिए पानी खींचा था और टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं करवाई गई थी। जांच में यह भी पता चला कि इस दूषित पानी के कारण स्कूल के अधिकांश विद्यार्थियों ने बीमारी का शिकार किया था, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने अग्रिम आदेश तक स्कूलों को बंद रखने के निर्देश जारी किए थे।

न्यायालय उप जिलाधिकारी एवं परगना मजिस्ट्रेट, नैनीताल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 152(1) के तहत तत्काल प्रभाव से स्कूल की टंकी के पानी का उपयोग रोक दिया है। प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को टंकियों की पूर्ण सफाई और विसंक्रमण (डिसइंफेक्शन) कराने के साथ ही पानी के नमूनों को अधिकृत प्रयोगशाला में भेजने का निर्देश दिया है। स्कूल को 13 सितंबर 2026 तक सभी आवश्यक कार्रवाइयां पूरी करनी होंगी और 14 सितंबर को न्यायालय में अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करनी होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक पानी निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करता, तब तक उसे पेयजल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, और स्कूल को विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित पानी की पर्याप्त व्यवस्था तत्काल करनी होगी।

स्थानीय लोगों और ग्रामीण परिवारों के सामने अब दोहरी मुश्किल है; एक ओर बीमारों के इलाज का बोझ और दूसरी ओर सुरक्षित पानी की कमी। हालांकि, प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे केवल जांचे गए और सुरक्षित पानी का ही सेवन करें और किसी भी स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। जल संस्थान और स्वास्थ्य विभाग मिलकर इस संकट को संभालने में जुटे हैं, जिसमें प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित इलाकों तक सुरक्षित पेयजल की स्थायी और अखंडित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।