देवभूमि में सनातन का अपमान या संवैधानिक अधिकार? दुष्यंत गौतम के तिलक पोंछने का वीडियो वायरल, कांग्रेस ने मांगी सार्वजनिक माफी

उत्तराखंड की राजनीतिक परिदृश्य में एक नया और तीखा विवाद प्र Breaking हुआ है, जिसके केंद्र में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम का हालिया दौरा और उनके द्वारा तिलक पोंछने का वायरल हुआ वीडियो है। लंबे अरसे बाद हल्दवानी पहुंचे दुष्यंत गौतम की मौजूदगी ने न सिर्फ हल्दवानी में बीजेपी कार्यसमिति की बैठक को नया बखेड़ा देकर भुनोड़ा, बल्कि यह घटना विपक्ष, खासतौर पर कांग्रेस पार्टी के लिए बीजेपी पर हमला बोलने का एक बड़ा मौका बन गई है। इस पूरी घटनाक्रम ने उत्तराखंड की सियासत में एक नई चर्चा शुरू कर दी है, जहां धार्मिक परंपराओं और राजनीतिक प्रोटोकॉल के बीच की खाई को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।

दरअसल, नितिन नबीन के दो दिवसीय दौरे के दौरान हल्दवानी पहुंचे दुष्यंत गौतम का बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उत्तराखंड, जिसे ‘देवभूमि’ के नाम से जाना जाता है, में तिलक लगाना एक गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। महिला कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी के साथ दुष्यंत गौतम के माथे पर तिलक लगाया, लेकिन कुछ ही सेकंडों बाद दुष्यंत गौतम ने अपने हाथ से वह तिलक पोंछ दिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि तिलक लगते ही उन्होंने उसे मिटा दिया, और इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी उनके पास मौजूद थे, हालांकि भट्ट ने इस हरकत पर तत्काल कोई आपत्ति नहीं जताई। यह दृश्य ने सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल होने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी।

वायरल वीडियो को देखते ही कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का प्रयास किया। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने एक विस्तृत बयान जारी कर दुष्यंत गौतम के इस कदम को ‘देवभूमि और सनातन धर्म का अपमान’ करार दिया। प्रतिमा सिंह ने न केवल तिलक पोंछने की घटना पर सवाल उठाए, बल्कि दुष्यंत गौतम के नाम की कानूनी या सामाजिक विवादों में उभरने की परवाह किए बिना उनकी उत्तराखंड में उपस्थिति और व्यवहार पर भी सवालिया निशान खड़े किए। कांग्रेस का मानना है कि एक ऐसा व्यक्ति, जिसका नाम विवादास्पद मामलों से जुड़ा है, का धार्मिक परंपराओं को नजरअंदाज करना और तिलक मिटाना उत्तराखंड की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रत्यक्ष प्रयास है।

विपक्ष की इस तीखी आलोचना के बाद अब प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या यह घटना केवल एक व्यक्तिगत आदत का परिणाम थी या इसमें राजनीतिक गणना थी? कांग्रेस ने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि दुष्यंत गौतम को अपनी इस हरकत के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए, अन्यथा इसका राजनीतिक प्रभाव गंभीर होगा। इस मामले ने उत्तराखंड में धर्म और राजनीति के अटूट बंधन को लेकर जो चर्चा शुरू की है, वह आने वाले दिनों में और गरमाती दिखने की संभावना है, विशेष कर तब जब जब विपक्ष इसे ‘सनातन धर्म के प्रति अपमान’ के तौर पर पेश कर रहा है और सत्ताधारी दल इसे एक सामान्य व्यक्तिगत कदम के तौर पर समझने की कोशिश कर रहा है।