मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाये गये 4,480 स्टॉलों का शुभारंभ और निरीक्षण किया। यह कार्यक्रम ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं के हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार में पहुँचाना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले वर्ष से रक्षाबंधन के 15 दिन पहले ही ‘सशक्त बहना उत्सव’ शुरू किया जाएगा और इसे पखवाड़े के रूप में आयोजित किया जाएगा। इस पहल से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए अधिक समय और बेहतर बाजार उपलब्ध होगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
विभिन्न जनपदों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ी महिलाओं ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों से उन्हें आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन की अग्रिम शुभकामनाएँ देते हुए सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से इन स्टॉलों से खरीदारी कर महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना पर बल दिया, कहकर कि स्थानीय उत्पादों को अपनाकर हम मातृशक्ति के परिश्रम और हुनर का सम्मान करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।
उत्तराखण्ड की मातृशक्ति को सामाजिक और आर्थिक प्रगति का आधार बताते हुए, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को देश के विकास का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और ‘लखपति दीदी’ अभियान जैसी योजनाओं के प्रभाव का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2023 में ‘सशक्त बहना उत्सव योजना’ की शुरुआत इस उद्देश्य से की गई थी कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा बनाए गए गुणवत्तापूर्ण स्थानीय उत्पाद घर और गांव तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें व्यापक बाजार, उचित मूल्य और नई पहचान मिले। वर्तमान में प्रदेश में 70,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं, जिनसे 5,20,000 से अधिक ग्रामीण परिवार जुड़े हुए हैं।
तीन वर्षों में 95 विकासखंडों में 4,480 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनसे लगभग 12.5 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई है। इसके अलावा, 49 ग्रोथ सेंटर, 17 सरस सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 8 बेकरी यूनिट स्थापित की गई हैं। 110 बिक्री केंद्रों के साथ-साथ स्थायी बिक्री केंद्र और राज्य स्तरीय सरस मेलों के माध्यम से भी महिला समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि राज्य सरकार के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। 3 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना चुकी हैं। ‘सशक्त बहना उत्सव’ का विस्तार कर इसे ‘सशक्त बहना बाजार’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि महिलाओं के उत्पादों को पर्यटन स्थलों, धार्मिक यात्रा मार्गों, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट और होटल-रिसॉर्ट तक पहुँचाया जा सके।
प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है, और महिलाओं को गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग, डिजिटल भुगतान और विपणन का प्रशिक्षण देकर उनके उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी दिया है और समान नागरिक संहिता लागू करके उनकी सुरक्षा और समान अधिकारों को सुनिश्चित किया है।
इस कार्यक्रम में प्रमुख सचिव श्री आर.के.सुधांशु, सचिव श्री धीराज गर्ब्याल, उप सचिव सुश्री झरना कमठान, श्रीमती अनुराधा पाल, मुख्य विकास अधिकारी देहरादून श्री अभिनव शाह और सभी जनपदों के मुख्य विकास अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित थे।
