उत्तराखंड में संस्कृत को बढ़ावा देने की पहल

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कुंभ से पहले हरिद्वार-ऋषिकेश से शुरुआत का सुझाव

केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों से मिले सचिव दीपक कुमार

राजमार्ग, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर संस्कृत में नामपट्ट लगाने का आग्रह

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे।

दीपक कुमार ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर से भेंट कर उत्तराखंड के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगे संकेतक और नामपट्ट संस्कृत भाषा में भी अंकित कराने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी और संस्कृत के प्रचार को नई दिशा मिलेगी।

इसके बाद उन्होंने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा रेल मंत्रालय के सचिव सतीश कुमार से मुलाकात कर उत्तराखंड के सभी रेलवे स्टेशनों, अधिकारियों के कक्षों और अन्य प्रमुख स्थानों पर संस्कृत में भी नामपट्ट लगाने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया।
उड्डयन मंत्रालय के अपर सचिव पुनीत कंसल से मुलाकात के दौरान संस्कृत शिक्षा सचिव ने देहरादून के जॉलीग्रांट हवाई अड्डे पर संस्कृत में नाम एवं पदनाम अंकित किए जाने पर आभार व्यक्त किया। साथ ही पंतनगर हवाई अड्डे और राज्य के अन्य हेलीपोर्टों पर भी इसी व्यवस्था को लागू करने का अनुरोध किया। उन्होंने क्षेत्रीय हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन जॉलीग्रांट के बजाय सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट से किए जाने का सुझाव भी दिया, ताकि यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सके।

आगामी वर्ष प्रस्तावित कुंभ मेले को देखते हुए दीपक कुमार ने रेल और सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिवों से हरिद्वार और ऋषिकेश से संस्कृत नामपट्ट लगाने की पहल शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने इस संबंध में उत्तराखंड के मुख्य सचिव द्वारा प्रेषित पत्र भी तीनों मंत्रालयों के अधिकारियों को सौंपे और राज्य सरकार का पक्ष विस्तार से रखा।

संस्कृत शिक्षा सचिव ने कहा कि इन प्रयासों से उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी बल मिलेगा।

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