सकंड गांव के ग्रामीणों ने उठाया फावड़ा: कर्णप्रयाग में लंबे इंतजार के बाद खुद बनाने लगे सड़क, 2027 चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

उत्तराखंड के कर्णप्रयाग विकासखंड के सकंड गांव में सड़क सुविधा की लंबी और कठिन लड़ाई अब नए मोड़ पर आ गई है। शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बार-बार किए गए पत्राचार और आंदोलनों के बावजूद जब गांव तक सड़क नहीं पहुंची, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने निराशा को पीछे छोड़कर अपने ही संसाधनों और श्रमदान के जरिए सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया। ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में वीरेंद्र सिंह, दाताराम, देवली, रघुवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, उषा देवी और सरस्वती देवी समेत स्थानीय नागरिकों ने गेती, फावड़ा और बेलचे उठाकर रास्ता खोदना शुरू किया है। यह कदम न केवल उनकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि जिम्मेदार विभागों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचने का एक प्रबल संकेत भी है।

सड़क की अनुपस्थिति ने गांव की रोजमर्रा की जिंदगी को नरक बना दिया है, जहाँ बुजुर्गों, बीमार लोगों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में ग्रामीणों को अपनी जरूरतों के लिए करीब नौ किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। किसी के बीमार पड़ने पर उसे पैदल खोई तक पहुंचाना पड़ता है, जिससे वाहन द्वारा कर्णप्रयाग या अस्पताल तक पहुँचाने में देरी होती है। आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है, जबकि कृषि उपज को बाजार तक ले जाना और जरूरी सामान लाना भी अब संभव नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण हेतु कई बार सर्वे भी करवाए जा चुके हैं, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया।

यह आंदोलन नया नहीं है; पांच और छह जनवरी को ग्रामीणों ने सड़क की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उस समय विधायक अनिल नौटियाल ने तीन महीने के भीतर सर्वे कराने और सड़क कटिंग का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया था। हालांकि, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी सरकारी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों का विश्वास टूट गया। अब ग्रामीणों ने एक कठोर चेतावनी जारी की है कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सकंड गांव को सड़क से नहीं जोड़ा गया, तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने पर विचार करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति पैदा होने की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

शासनिक स्तर पर भी अब इस मामले पर गंभीरता से चर्चा हो रही है। उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग अल्केश नौटियाल ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा अपनी तरफ से सड़क बनाने की सूचना उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस जगह पर ग्रामीण सड़क निर्माण कर रहे हैं, वह वन भूमि के अंतर्गत आती है। इसलिए, इस संबंध में संबंधित वन विभाग और अन्य अधिकारियों को सूचना दी जा रही है ताकि नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जा सके। ग्रामीणों की अंतिम मांग है कि सरकारी स्तर पर जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, सड़क निर्माण को औपचारिक स्वीकृति दी जाए और काम शुरू कराया जाए, ताकि इस वंचित गांव के लोगों को अपने मूल अधिकार से वंचित रहना न पड़े।