मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निजी विश्वविद्यालयों में नर्सिंग पाठ्यक्रमों के संचालन हेतु गठित एम्पावर्ड समिति की बैठक में यह स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दक्ष और विशेषज्ञ मेडिकल मानव संसाधन की उपलब्धता को सुनिश्चित करना अब प्राथमिकता बन गया है। बैठक में नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ के कौशल विकास, मानक अनुपालन और विदेशों में रोजगार के अवसरों पर गहन चर्चा हुई।
समिति के तहत, मुख्य सचिव ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को यह निर्देश दिया कि नर्सिंग पाठ्यक्रमों के लिए निर्धारित शैक्षणिक, आधारभूत एवं अन्य मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। साथ ही, प्रदेश में मेडिकल मानव संसाधनों की आवश्यकता और उपलब्धता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ का व्यवस्थित डाटा बैंक तैयार करने का आदेश दिया गया। इस डाटा बैंक में बड़े मेडिकल कॉलेजों के नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या, योग्यता, विशेषज्ञता और कौशल संबंधी जानकारी संकलित की जाएगी।
मुख्य सचिव ने विशेष रूप से 2027‑28 वित्तीय वर्ष में 500 नर्स और वार्ड बॉय को विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा। पश्चिम एशिया, पश्चिमी यूरोप, एस्टोनिया और खाड़ी देशों को प्राथमिकता के आधार पर लक्षित किया गया है। इन देशों में मेडिकल एवं पैरामेडिकल स्टाफ की मांग, योग्यता, भाषा दक्षता और आवश्यक प्रशिक्षण की जाँच के बाद उपयुक्त रोजगार अवसरों की पहचान की जाएगी। इसके अलावा, विदेशों में रोजगार चाहने वाले युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने हेतु प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की व्यवस्थाएँ भी स्थापित की जाएंगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि निजी विश्वविद्यालयों में नर्सिंग पाठ्यक्रमों के संचालन हेतु कुल 73 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से छह को योग्य माना गया और पाँच को नर्सिंग पाठ्यक्रम संचालन के लिए अनुमोदित किया गया। एक आवेदन को अगली समिति की बैठक में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। मुख्य सचिव ने अस्पतालों को दक्ष, प्रशिक्षित एवं विशेषज्ञ मेडिकल मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का भी निर्देश दिया। इस योजना के तहत नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती को प्रति बैड के निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं में सुधार हो सके।
