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यूपीसीएल को उपभोक्ता को 2.15 लाख रुपये देनी होगी — शॉर्ट‑सर्किट से घर में लगी आग पर आयोग का कड़ा आदेश

देहरादून में 25 नवंबर 2014 को एक घरेलू बिजली मीटर में शॉर्ट‑सर्किट के कारण अचानक आग लगने की घटना ने उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी। लगभग 3:30 सुबह मीटर की वायरिंग, फ्यूज और डी‑पी स्विच से होकर आग बरामदे तक पहुँच गई, जिससे घर के कई सामान बर्बाद हो गए। घटना के बाद तुरंत स्थानीय पुलिस, अग्निशमन विभाग और ऋषिकेश स्थित विद्युत वितरण खंड के अवर अभियंता को सूचना दी गई; कुछ ही दिनों बाद लेखपाल ने स्थल का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।

विरोधी पक्ष, उत्तराखण्ड पावर कंपनी लिमिटेड (यूपीसीएल), ने प्रारम्भ में दुर्घटना की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया और तर्क दिया कि आग उपभोक्ता के परिसर की आंतरिक वायरिंग में खराबी के कारण लगी, न कि कंपनी की सर्विस लाइन में। कंपनी ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के उपभोक्ता उपकरणों के रखरखाव से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए अपनी स्थिति को बल दिया। परन्तु 21 मई 2015 को विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 161 के तहत तैयार की गई निरीक्षण रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि आग का मूल कारण मीटर के पास शॉर्ट‑सर्किट था और साथ ही सर्विस लाइन पर एरियल फ्यूज की अनुपस्थिति भी दर्ज की गई।

इन तथ्यों को देखते हुए, उपभोक्ता आयोग ने 23 जून 2016 को दायर शिकायत के आधार पर यूपीसीएल को कुल 2.15 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया। आदेश में 2 लाख रुपये को क्षतिपूर्ति, 10 हजार रुपये को मानसिक कष्ट के लिए और 5 हजार रुपये को मुकदमे के खर्च के रूप में निर्धारित किया गया। साथ ही, 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी लागू किया गया, जो शिकायत दर्ज होने से भुगतान तक के अंतराल पर लागू होगा। आयोग ने कंपनी को यह राशि 45 दिन के भीतर चुकाने का निर्देश दिया, जिससे उपभोक्ता को समय पर राहत मिल सके।

आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि CEA के विनियम‑13 के तहत बिजली आपूर्ति करने वाले पक्ष की जिम्मेदारी है कि उसकी नियंत्रण वाली आपूर्ति लाइन, तार, फिटिंग और उपकरण सभी सुरक्षित स्थिति में हों। इस दिशा‑निर्देश के आधार पर, आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि यूपीसीएल ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की, इसलिए शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार कर कुल 2.15 लाख रुपये का भुगतान अनिवार्य किया।

Original Title: घर में मीटर से लगी आग, अब यूपीसीएल को देना होगा 2.15 लाख रुपये; आयोग का बड़ा आदेश

Original Content: UPCL | Consumer Commission | Dehradun :देहरादून में बिजली मीटर में शॉर्ट सर्किट के बाद घर में लगी आग के मामले में उपभोक्ता आयोग ने यूपीसीएल को उपभोक्ता को 2.15 लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए क्षतिपूर्ति, मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च की रकम तय की है।
आयोग के आदेश के मुताबिक यूपीसीएल को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति के तौर पर, 10 हजार रुपये मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के लिए तथा पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने होंगे। दो लाख रुपये की क्षतिपूर्ति पर शिकायत दर्ज किए जाने की तारीख 23 जून 2016 से भुगतान होने तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। आयोग ने पूरी राशि का भुगतान 45 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं।
मामला 25 नवंबर 2014 का है। शिकायतकर्ता के मुताबिक तड़के करीब 3:30 बजे घर में लगे बिजली मीटर में शॉर्ट सर्किट हुआ। इसके बाद आग मीटर की वायरिंग, फ्यूज और डीपी स्विच से होते हुए बरामदे तक पहुंच गई। आग की वजह से घर में रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया।
घटना के दिन ही पुलिस, अग्निशमन विभाग और ऋषिकेश स्थित विद्युत वितरण खंड के अवर अभियंता को इसकी सूचना दी गई थी। इसके कुछ दिन बाद लेखपाल ने भी मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की।
मामले की जांच के दौरान विद्युत निरीक्षक ने 21 मई 2015 को विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 161 के तहत निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में आग की शुरुआत मीटर के पास शॉर्ट सर्किट से होने की बात सामने आई। रिपोर्ट में सर्विस लाइन पर एरियल फ्यूज नहीं होने का भी उल्लेख किया गया था।0
मामले की सुनवाई के दौरान यूपीसीएल ने हादसे की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया। निगम की ओर से कहा गया कि आग उसकी सर्विस लाइन में खराबी के कारण नहीं लगी…बल्कि उपभोक्ता के परिसर की आंतरिक वायरिंग में खराबी से हादसा हुआ।
यूपीसीएल ने इस संबंध में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के उपभोक्ता उपकरणों के रखरखाव से जुड़े नियमों का भी हवाला दिया।
आयोग ने कहा कि यूपीसीएल यह साबित नहीं कर सका कि आग केवल उपभोक्ता के घर की आंतरिक वायरिंग में खराबी के कारण लगी थी। वहीं विद्युत निरीक्षक की रिपोर्ट में सर्विस लाइन पर एरियल फ्यूज नहीं होने की बात दर्ज थी।
आयोग ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के विनियम-13 का हवाला देते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति करने वाले पक्ष की जिम्मेदारी है कि उसके नियंत्रण वाली आपूर्ति लाइन, तार, फिटिंग और उपकरण सुरक्षित स्थिति में रहें।
इसी आधार पर आयोग ने माना कि यूपीसीएल अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा। आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कुल 2.15 लाख रुपये देने के आदेश जारी किए हैं।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

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