उधमसिंह नगर जिले के जसपुर में स्थित यूको बैंक (UCO Bank) की शाखा में 11 जुलाई 2018 को एक चौंकाने वाला अपराध हुआ। बैंक के ही चपरासी दुष्यंत कुमार ने ग्राहकों के गिरवी रखे सोने‑चांदी के गहने चुराए, जबकि बैंक ने तुरंत उन्हें निलंबित कर एफआईआर और चार्जशीट दर्ज कराई। फिर भी, उन ग्राहकों—जसपुर निवासी शीतल अग्रवाल और पंकज कुमार—को अपने जेवर वापस पाने के लिये कई सालों तक अंधेरे में रखा गया। शीतल ने 3.98 लाख और पंकज ने 2.31 लाख की पूरी राशि, ब्याज सहित, चुका कर 2023 में अपने गिरवी सोने की माँग की, पर बैंक ने न तो गहने लौटाए और न ही चोरी की सच्ची वजह बताई। कानूनी नोटिस मिलने पर बैंक ने कहा कि चपरासी ने चोरी की है और मामूली मुआवजा देकर समझौता करने का दबाव बना रहा।
इन घटनाओं के खिलाफ ग्राहक अधिवक्ता नदीम उद्दीन ने जिला उपभोक्ता आयोग, उधमसिंह नगर में शिकायत दायर की। आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्य नवीन चंद्र चंदौला और डॉ. मनीला ने सुनवाई के दौरान बैंक की लापरवाही को “सेवा में गंभीर कमी” (Service Deficiency) के रूप में उजागर किया। उन्होंने बैंक को सख्त आदेश दिया: यदि 45 दिन के भीतर चोरी हुए जेवर वापस नहीं किए गए, तो लोन समाप्ति के दिन सोने की बाजार दर के अनुसार मूल्य के साथ 6 % साधारण ब्याज जोड़कर पूरी राशि का भुगतान करना होगा। इसके अतिरिक्त, दोनों पीड़ितों को प्रत्येक 5 हजार रुपये की मानसिक क्षतिपूर्ति और 2 हजार रुपये की वाद‑व्यय की राशि भी देनी होगी।
आदेश के बाद यूको बैंक ने अपनी गलती स्वीकार कर दोनों ग्राहकों के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट (DD) आयोग में जमा कर दिए। इस कदम ने स्पष्ट कर दिया कि बैंक के अंदर कर्मचारियों की चूक या चोरी के कारण आम उपभोक्ता को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। कुल मिलाकर, बैंक को 14.18 लाख रुपये का भुगतान करना होगा—जो गिरवी सोने की चोरी से हुए नुकसान और अतिरिक्त मुआवजे दोनों को समेटे हुए है। यह घटना न केवल बैंकिंग क्षेत्र में सुरक्षा तंत्र की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में उपभोक्ता आयोग की निर्णायक भूमिका को भी रेखांकित करती है।
