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कर्नाटक के CEO के बयान से उठे सवाल: फॉर्म‑7 के बड़े दुरुपयोग का उत्तराखंड के चुनावी परिदृश्य पर क्या प्रभाव?

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देश भर में हाल ही में फॉर्म‑7 के थोक दुरुपयोग को लेकर तीखी बहस छिड़ी है, और इस सिलसिले में कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अनबू कुमार के एक बयान ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने बेंगलुरु में कहा कि फॉर्म‑7 जमा होने के बावजूद, अभी तक किसी भी चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) ने इन मामलों की जांच शुरू नहीं की है, जबकि इस विषय पर पुलिस ने कई आपराधिक एफआईआर दर्ज कर ली हैं। इस कथन ने यह संकेत दिया कि केवल फॉर्म‑7 जमा करने से किसी वैध मतदाता का नाम तुरंत सूची से नहीं हटाया जाता; व्यक्तिगत सुनवाई और स्थल पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की आवश्यकता होती है, जो कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत ERO के विवेकाधिकार में है।

कर्नाटक में 16 जून से 4 अक्टूबर के बीच अकेले 91,000 से अधिक फॉर्म‑7 जमा हुए, फिर भी विभागीय जांच की गति धीमी बनी हुई है। नियम के अनुसार, जांच शुरू होने के बाद जवाब देने के लिए केवल सात दिन का समय allotted है; इस देरी से फर्जीवाड़े करने वालों पर “रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960” के तहत कानूनी कार्रवाई करना कठिन हो जाता है। वहीं, पुलिस ने भाजपा नेता और बूथ‑लेवल एजेंट टी. श्रीनिवास मोथकुर पर 7,500 से अधिक वोटरों के नाम फर्जी तरीके से कटवाने की साजिश के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353 के तहत FIR दर्ज की, और अब तक राज्य में कुल छह ऐसी FIR दर्ज हो चुकी हैं।

उत्ताराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान भी भाजपा कार्यकर्ताओं और BLA द्वारा बड़ी संख्या में फॉर्म‑7 जमा करने के मामले सामने आए। विपक्ष ने इसे वैध मतदाताओं के संवैधानिक अधिकार छीनने की साजिश बताया, जिसमें नकली दस्तावेज़ और फर्जी हस्ताक्षर शामिल थे। कर्नाटक के CEO के बयान से यह स्पष्ट होता है कि यदि जांच में देरी बरकरार रहती है, तो उत्तराखंड में भी इसी प्रकार की धीमी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है, जिससे चुनावी माहौल में भरोसा और वैधता दोनों पर प्रश्न चिह्न लग सकते हैं।

**Original Title: ** थोक में फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल पर कर्नाटक के CEO के बयान के उत्तराखंड के लिए क्या हैं मायने?

**Original Content: ** इन दिनों देश और उत्तराखंड में थोक में फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल पर वितंडा मचा हुआ है ऐसे में कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अनबू कुमार के एक बयान ने ने पूरे देश में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज हो जाने के बावजूद बंगलुरु में कहा है कि थोक में जमा किए गए फॉर्म-7 के मामलों में अब तक चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ERO) द्वारा कोई जांच शुरू नहीं की गई है। … (remaining original text)

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।