बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ती उम्र के साथ भारत में न्यूरोलॉजिकल एवं मस्कुलोस्केलेटल रोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। हॉल्डवानी में स्थित अपने क्लिनिक में रोगियों का इलाज करने वाले डॉ. दीपक मेर ने बताया कि फिजियोथेरेपी न केवल पैरालिसिस, पार्किंसन रोग और एंकायलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस जैसी गंभीर स्थितियों में लक्षणों को कम करती है, बल्कि रोगियों को स्वतंत्र रूप से चलने‑फिरने और दैनिक कार्यों को सहजता से करने में सक्षम बनाती है।
डॉ. मेर के अनुसार, पैरालिसिस के मामलों में फिजियोथेरेपी के माध्यम से मांसपेशियों की टोन को पुनः स्थापित किया जाता है और न्यूरल प्लास्टिसिटी को बढ़ावा दिया जाता है। नियमित रूप से किए जाने वाले स्ट्रेचिंग, रेंज‑ऑफ़‑मोशन एक्सरसाइज़ और बायोमैकेनिकल प्रशिक्षण से रोगियों की गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। इसी तरह, पार्किंसन रोगियों को संतुलन, समन्वय और गति की गति को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यायामों का उपयोग किया जाता है, जिससे गिरने के जोखिम में कमी आती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
एंकायलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस, जो रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करने वाली एक गंभीर सूजनजन्य स्थिति है, में फिजियोथेरेपी द्वारा लचीलापन बढ़ाने और दर्द को कम करने के उपायों को अपनाया जाता है। डॉ. मेर ने बताया कि रोगी के व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए व्यायाम कार्यक्रम, पोस्टural ट्रेनिंग और फिजिकल एजेंट्स के उपयोग से रीढ़ की गति में सुधार और रोग की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।
डॉ. मेर ने यह भी रेखांकित किया कि फिजियोथेरेपी केवल शारीरिक उपचार नहीं, बल्कि रोगियों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करती है। निरंतर देखभाल, रोगी शिक्षा और घर पर किए जाने वाले व्यायामों की नियमितता से उपचार की सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि पाई गई है। उन्होंने सभी रोगियों को सलाह दी कि समय पर फिजियोथेरेपी शुरू करने से दीर्घकालिक जटिलताओं से बचा जा सकता है और जीवन में सक्रिय भागीदारी को पुनः स्थापित किया जा सकता है।
Original Title: लकवा, पार्किंसन और कमर की गंभीर बीमारी में कैसे मददगार है फिजियोथेरेपी? डॉ. दीपक मेर ने बताया
Original Content: Physiotherapy | Paralysis | Parkinson Disease : Haldwani : बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ती उम्र के साथ कई तरह की शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं सामने आ रही हैं। पैरालिसिस, एंकायलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस और पार्किंसन ऐसी बीमारियां हैं….जो व्यक्ति की चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों […]
