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चंपावत से बदलाव का संदेश: धामी कैबिनेट ने 24 फैसलों से उठाया विकास और सुधार का झंझट

उत्तराखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक नज़रों का केंद्र बन चुके चंपावत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक का समापन हो गया है, जिसमें 24 अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मंजूरी दी गई। यह बैठक न केवल प्रशासनिक सुधारों के लिए, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हुई है। मुख्यमंत्री धामी ने इस बैठक को ‘विकास और जनकल्याण’ की यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया, जहाँ हर फैसला प्रत्यक्ष रूप से आम नागरिकों के जीवन स्तर को उठाने पर केंद्रित था।

सबसे पहले, कैबिनेट ने टीडीसी (ट्रिब्यूनल ऑन डिपॉजिट एंड क्लेम) को 66 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को स्वीकृत किया, जिससे कर्मचारियों के मुद्दों का निपटारा तेजी से होगा। साथ ही, कर्मचारी आचरण नियमों में बड़ा बदलाव लाया गया है। नए नियमों के तहत समूह ‘क’ और समूह ‘ख’ के कर्मचारियों को अब साल में एक बार अपनी संपत्ति का विवरण जमा करना होगा, जबकि समूह ‘ग’ के कर्मचारियों के लिए यह अवधि पांच साल की होगी। इस कदम से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रांतीय रक्षक दल के वरिष्ठ अधिकारियों को समूह ‘ख’ के पदों पर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई, जो प्रशासनिक दक्षता को बढ़ावा देगी।

कृषि और पशुपालन विभाग के लिए भी ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में कुक्कुट पालन को प्रोत्साहित करने के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है, जिससे लगभग 2,000 किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों के लिए एक महानिदेशक के पद की स्थापना को स्वीकृति मिली है, जो इन क्षेत्रों के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करेगा। रोजगार के क्षेत्र में, युवाओं को आवश्यक कौशल प्रदान करने के लिए 200 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग युवाओं को आधुनिक स्किल ट्रेनिंग के साथ जोड़ेगा, जिससे राज्य में बेरोजगारी कम होगी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के मानदंडों में राहत दी गई है; अब 10 एकड़ जमीन की जगह केवल 20,000 वर्ग मीटर जमीन पर विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति होगी और 5 करोड़ रुपये के गारंटी फंड की शर्त हटा दी गई है। इससे उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का फैसला मंगलमय साबित होगा। इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा विभाग में स्किल डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाने से एक लाख से अधिक छात्रों को लाभ मिलेगा।

प्रशासनिक सुधार और भूमि व्यवस्था के मुद्दों पर भी कैबिनेट ने सख्ती बरतते हुए निर्णय लिए। खटीमा, बनबसा, चंपावत समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में नजूल भूमि के नियमितीकरण के लिए अभियान चलाया जाएगा। वन भूमि से जुड़े मुद्दों के निस्तारण के लिए पीएमयू (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) बनाने और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का फैसला लिया गया है। अंत में, टिहरी जिले के नरेंद्र नगर में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोलने की अनुमति दी गई है, जिससे स्थानीय लोगों को दस्तावेज़ों की प्रमाणीकरण प्रक्रिया में आसानी होगी। चंपावत में हुई यह बैठक उत्तराखंड के हितैशी कदमों की शुरुआत का प्रतीक है।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

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