📅 Thursday, 24 September 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
होम » खबरनामा » MBBS आडंबर: SIT ने भोपाल के एजेंट को दबोचा, 5 लाख कमीशन और फर्जी ‘सेनानी’ प्रमाणपत्र का पर्दाफाश

MBBS आडंबर: SIT ने भोपाल के एजेंट को दबोचा, 5 लाख कमीशन और फर्जी ‘सेनानी’ प्रमाणपत्र का पर्दाफाश

निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए सरकारी कोटों का दुरुपयोग करने वाले भ्रष्टाचार के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित (सैनिक परिवारों के लिए आरक्षण) के फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर छात्रों को MBBS में दाखिला दिलाने वाले अवैध नेटवर्क का पुख्ता तबूल हो गया है, जिसमें विशेष जांच दल (SIT) ने भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब जांच टीम ने इस मामले में पहले ही दो अन्य आरोपियों को जेल भेज दिया था। धीरज के कब्जे से करीब पांच लाख रुपये की धनराशि बरामद की गई, जो इस चोरी-छिपे कारोबार के आर्थिक मायनों में कितना खतरनाक है, इसका स्पष्ट संकेत देती है।

धीरज कुमार श्रीवास्तव, जो भोपाल में ‘एमबीबीएस वे’ नामक कार्यालय संचालित करता था, निजी विश्वविद्यालयों में MBBS, B.Tech, BCA, BBA और B.Com जैसी विभिन्न प्रोफेशनल डिग्री पाठ्यक्रमों में छात्रों को कमीशन के आधार पर दाखिल दिलाने का व्यवसाय करता था। SIT की जांच के दौरान सामने आया कि धीरज ने पूर्व में रूपेश पंडित नाम के व्यक्ति से यह पांच लाख रुपये कमीशन के रूप में लिए थे। आरोपी ने स्वीकारा कि यह रकम उन छात्रों के लिए स्वीकार की गई थी जिन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत आरक्षण दिया जा रहा था, हालांकि वास्तविकता में वे इस आरक्षण के पात्र नहीं थे।

पुलिस की गहन पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि धीरज कुमार ने रूपेश पंडित और अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर कम से कम तीन अभ्यर्थियों के लिए फर्जी दस्तावेजों की टंकी तैयार करवाई गई थी। इन अवैध दस्तावेजों के आधार पर छात्रों को ‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित’ के प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे वे कानूनन पात्र नहीं होने के बावजूद MBBS में दाखिला लेने का प्रयास कर रहे थे। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे अवैध एजेंसियां आरक्षण नीतियों का दुरुपयोग करके शिक्षा प्रणाली में न्याय को धोखा दे रही हैं और असली पात्र छात्रों के हितों को नुकसान पहुंचा रही हैं।

अब SIT की नजर इस चोरी-छिपे खेल की तकनीकी और प्रशासनिक कड़ियों पर है। जांच एजेंसी यह पता लगाने के लिए प्रयास कर रही है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों पर डिजिटल हस्ताक्षर किस स्तर पर और किस तकनीकी माध्यम से किए गए थे। डिजिटल फॉरेंसिक एनालिसिस के जरिए यह तय किया जाएगा कि प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारी या संस्था के स्तर पर कौन-कौन शामिल था। साथ ही, फर्जी दस्तावेज बनाने से लेकर दाखिले की पूरी प्रक्रिया तक में जो अन्य लोग शामिल हैं, उनकी भूमिका का भी पता लगाया जाएगा। यह जांच न केवल जुर्म के अपराधियों को जेल भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यह भी सुनिश्चित करेगी कि आगे आरक्षण नीतियों का दुरुपयोग न हो और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।