गदरपुर NH-74 पर बढ़ते हादसों ने खोला विवाद: कांग्रेस ने माँगा अंडरपास, प्रशासन ने सुनाई कमेटी का संकेत

उत्तराखंड के गदरपुर में नेशनल हाईवे-74 (NH-74) पर लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं की चिंताजनक स्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नया मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों की सुरक्षा और आवागमन को लेकर उभरते इस मुद्दे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तीखे विरोध की लपेट में ले लिया है। गोपाल नगर गांव के रास्ते पर सुरक्षित पारगमन की सुविधा के लिए अंडरपास निर्माण की ज़रूरत को उठाते हुए, कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र पाल सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी। यह प्रदर्शन न केवल राजनीतिक दबाव का इ Manifestation है, बल्कि इस क्षेत्र में वर्षों से जमी हुई लोकल कनेक्टिविटी और सुरक्षा की कमी को राष्ट्रीय स्तर पर उभारने की एक गंभीर कोशिश भी है, जहाँ हाईवे का ब्लॉकिंग या दुर्घटनाओं का खतरा आम नागरिकों के लिए एक सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।

प्रदर्शन के दौरान राजेंद्र पाल सिंह ने गदरपुर बाईपास की इंजीनियरिंग नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए, जो आधारभूत संरचना की असमानता को उजागर करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जबकि एक छोटे से गांव के लिए विशेष रूप से ओवरब्रिज का निर्माण कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर ग्रामीणों की सुविधा और सुरक्षा के लिए न तो कोई अंडरपास बनाया गया है, न ही ओवरब्रिज की कोई व्यवस्था की गई है। सिंह ने जोर देकर कहा कि जिन स्थानों पर ग्रामीणों की आवाजाही सबसे अधिक होती है, वही दुर्घटनाओं का मुख्य epicenter बन चुके हैं। उनके अनुसार, यह केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों की जानों से जुड़ा एक आपातकालीन मुद्दा है, जिसके लिए तत्काल अंडरपास का निर्माण अनिवार्य है ताकि भविष्य में और जानों का नुकसान न हो सके।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस मामले में स्पष्ट संदेश दिया है कि वे जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं मिल जाता, तब तक इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते रहेंगे। उनका दलिल यह है कि हाईवे पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे, न कि केवल बयानबाजी। इस बीच, प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है। गदरपुर तहसीलदार लीना चंद्र ने जानकारी देते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपा गया ज्ञापन प्राप्त कर लिया गया है और प्रशासन की नजर इस समस्या पर पहले से ही है। उन्होंने बताया कि बाईपास से जुड़ी यह समस्या सुलझाने के लिए तहसीलदार के नेतृत्व में तीन विभागों की एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।

यह कमेटी जल्द ही मौके का संयुक्त निरीक्षण करेगी, जहाँ न केवल इंजीनियरिंग संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा, बल्कि जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के सुझावों को भी ध्यान में रखा जाएगा। प्रशासन का दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद ही बाईपास पर आवश्यक कार्रवाई और सुरक्षा उपायों को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह बहस जारी रहेगी कि क्या प्रशासनिक प्रक्रियाएं पर्याप्त तेज़ हैं, या ग्रामीणों को तत्काल राहत देने के लिए और अधिक अग्रिम कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। यह स्थिति उत्तराखंड में राजमार्गों की सुरक्षा और ग्रामीण विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को रेखांकित करता है, जहाँ हर दिन की प्रतीक्षा भी जानों के लिए महंगी साबित हो सकती है।