हाईकोर्ट ने किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना रोकने के आदेश पर कड़ी सख्ती दिखाई और तत्काल ही मतगणना शुरू करने का निर्देश दिया। 22 सितंबर को दोनों नगरपालिकाओं में मतदान हुआ था, परंतु चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतगणना को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया था। इस निर्णय पर किच्छा निवासी अलीना मलिक ने याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने चुनाव के बाद की मतगणना को शीघ्र आरम्भ करने की माँग की।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति अलोक महरा की खंडपीठ के सामने हुई। 5 अक्टूबर को तय अगली सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग के मतगणना रोकने के आदेश को चुनौती देते हुए, मतगणना को तुरंत शुरू करने का निर्देश जारी किया। इस कदम से यह स्पष्ट हुआ कि चुनाव के बाद की प्रक्रिया को रोके जाने के कोई वैध कारण नहीं थे।
पिछली सुनवाई में चुनाव आयोग ने बताया था कि दोनों नगरपालिकाओं में 22 सितंबर को मतदान कराया जाएगा और मतदान के बाद की मतगणना को अगले आदेश तक रोकने का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद, किच्छा के निवासियों ने जनहित याचिका और अन्य याचिकाएँ दायर की थीं, जिनमें नईमुल हुसैन और अन्य नागरिकों ने सरकार द्वारा 43 नगर पालिका अध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित आरक्षण की अधिसूचना पर आपत्तियाँ जताई थीं।
याचिकाओं में यह भी दावा किया गया कि सरकार किच्छा में नगर पालिका चुनाव को टालना चाहती है, जबकि आरक्षण की सूचना में केवल 43 पालिकाओं के अध्यक्ष पदों का उल्लेख था। हाईकोर्ट ने इस विवाद को देखते हुए मतगणना को रोके रखने के आदेश को रद्द कर दिया और चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
इस निर्णय के बाद, किच्छा‑सिरौलीकलां चुनाव की मतगणना तुरंत आरम्भ होगी, जिससे चुनावी परिणाम शीघ्र घोषित किए जा सकेंगे। सरकार और चुनाव आयोग को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पूरी हो।
Original Title: हाईकोर्ट का सरकार को झटका!, किच्छा-सिरौलीकलां चुनाव मतगणना जल्द शुरू करने के दिए निर्देश
Original Content: किच्छा चुनाव की मतगणना रोकने पर हाईकोर्ट सख्त हो गया है। कोर्ट ने नगरपालिका किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका में हुए चुनाव की मतगणना ना करने के चलते राज्य चुनाव आयोग और सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। जिसमें कोर्ट ने कहा कि जब चुनाव हो गया है तो गतगणना पर रोक क्यों लगाई गई है। ऐसे में हाईकोर्ट ने जल्द मतगणना शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
किच्छा चुनाव की मतगणना रोकने पर हाईकोर्ट सख्त
दरअसल इस मामले में मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति अलोक महरा की खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई।मामले में किच्छा के रहने वाले अलीना मलिक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें बीते दिनों हुए किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना कराने की मांग की गई थी।
किच्छा-सिरौलीकलां चुनाव मतगणना पर लगी रोक हटाई
इससे पहले एकलपीठ के सामने साज्य चुनाव आयोग ने बताया था कि दोनों नगर पाकिकाओं में 22 सितंबर को मतदान कराया जाएगा। आयोग ने मतदान को लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी थी। हालांकि मतदान के बाद होने वाली मतगणना को अगले आदेश तक रोक दिया गया था। जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर तय की थी।
मतगणना जल्द शुरू करने के दिए निर्देश
अब याचिकाकर्ता की तरफ से खंडपीठ के सामने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के मतगणना रोकने के आदेश को चुनौती दी गई। इसी फर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मतगणना पर रोक लगाने वाले आदेश पर रोक लगाते हुए जल्द मतगणना शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
बताते चलें कि कोर्ट में किच्छा निवासी नईमुल हुसैन के साथ कई अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका और अन्य याचिकाएं दायर की थी। जिसमें कहा गयाथा कि सरकार ने प्रदेश की 43 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित आरक्षण की अधिसूचना जारी कर आम जनता से आपत्तियां मांगी थीं।
सरकार किच्छा में नगर पालिका का चुनाव टालना चाहती है
लेकिन इसमें किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण की बात नहीं की गई थी। याचिका में ये भी कहा गया कि सरकार किच्छा में नगर पालिका का चुनाव टालना चाहती है। इन पदों की टोटल संख्या के आधार पर रोस्टर तैयार किया जाना चाहिए। जबकि सरकार ने केवल 43 पालिका अध्यक्ष पदों पर ही रोस्टर तैयार किया।
Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.
