बदरीनाथ घाटी में ट्रांस भारत एविएशन के हेलिकॉप्टर का दुर्घटनाग्रस्त होना, चारधाम यात्रा के दौरान हवाई सेवाओं के सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है। 27 अक्टूबर 2024 को, बदरीनाथ से देहरादून की ओर रवाना हुआ हेलिकॉप्टर, कुल छह लोगों—चालक दल सहित—की जान ले गया। दुर्घटना के बाद, जांच एजेंसियां तकनीकी कारणों की जाँच में जुटी हैं, जबकि उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) और कंपनी के बीच विवाद तेज़ हो गया है। यूकाडा का दावा है कि मौसम के ख़राब होने के कारण उड़ान पर रोक लगाने के स्पष्ट आदेश जारी किए गए थे, जबकि ट्रांस भारत ने इन आदेशों की अनदेखी की और यात्रियों की सुरक्षा को जोखिम में डाल दिया। दूसरी ओर, कंपनी का कहना है कि उसे कोई ऐसा आदेश नहीं मिला था।
घटना के दिन बदरीनाथ घाटी और आसपास के इलाकों में मौसम बेहद खराब था। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, जो गंभीर मौसम के कारण हवाई सफ़र को जोखिमपूर्ण बताता है। यूकाडा के अनुसार, इसी कारण सभी हेलिकॉप्टर उड़ानों को तत्काल रोकने का निर्देश दिया गया था। यूकाडा के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय टोलिया ने बताया कि यह आदेश प्राधिकरण के संचालन प्रमुख (सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन अमित शर्मा) द्वारा जारी किया गया था और दुर्घटना से करीब एक घंटे पहले ही सभी संबंधित पक्षों को दिया गया था। फिर भी ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर उड़ान भरा और रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। टोलिया ने स्पष्ट किया कि हवाई सेवाओं का संचालन DGCA के नियमों के तहत ही होता है और खराब मौसम में उड़ान रोकना एक अनिवार्य सुरक्षा मानक है।
ट्रांस भारत एविएशन ने यूकाडा के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए अनभिज्ञता जताई। कंपनी के उड़ान संचालन निदेशक एस. भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें दिल्ली में रहते हुए उड़ान रोकने से जुड़ा कोई आदेश या पत्र प्राप्त नहीं हुआ था। इस बयान के बाद, जांच का एक प्रमुख बिंदु यह बन गया कि क्या यूकाडा का आदेश वास्तव में कंपनी के स्थानीय अधिकारियों और पायलट तक पहुँचाया गया था या नहीं। यदि आदेश जारी हुआ था, तो किस माध्यम से—ईमेल, मैसेज या फोन—से भेजा गया और बीच में कहाँ अटका रह गया, यह भी जांच में शामिल किया जा रहा है।
दुर्गम पहाड़ियों पर 8 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचा बचाव दल, सेना, ITBP, SDRF और NDRF की टीमों ने घटनास्थल पर पहुँचकर सभी छह शवों को बाहर निकाला। मृतकों के पार्थिव शरीरों को पहले जोशीमठ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाकर, फिर NTPC हेलिपैड से सेना और प्रशासन के हेलिकॉप्टर के जरिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश भेजा गया, जहाँ पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चल रही है। इस दर्दनाक हादसे में पाँच कर्नाटक के तीर्थयात्रियों और एक हेलिकॉप्टर पायलट की मृत्यु ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है, और सरकार व निजी कंपनियों के बीच तालमेल की कमियों पर सवाल उठते हुए, सुरक्षा मानकों की कड़ाई पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
Original Title: हेलीकॉप्टर हादसा: ऑरेंज अलर्ट के बावजूद उड़ान, यूकाडा ने उठाए सवाल; कंपनी बोली- नहीं मिला था रोक का हुक्म
Original Content: बदरीनाथ घाटी में हुए ट्रांस भारत एविएशन के हेलिकॉप्टर हादसे ने चारधाम यात्रा के दौरान हवाई सेवाओं के संचालन, सुरक्षा मानकों और प्रशासन की व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे में चालक दल के सदस्य सहित कुल छह लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद जहां एक तरफ जांच एजेंसियां तकनीकी कारणों का पता लगाने में जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) और विमानन कंपनी के बीच बयानों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यूकाडा का सीधा आरोप है कि मौसम के खराब मिजाज को देखते हुए उड़ान पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन कंपनी ने इन आदेशों की अनदेखी की और यात्रियों की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया। वहीं, कंपनी का कहना है कि उसे ऐसा कोई आदेश मिला ही नहीं था। …
