दूरसंचार विभाग ने मोबाइल सिम कार्ड के दुरुपयोग और आईएमईआई (IMEI) नंबर में छेड़छाड़ को लेकर नागरिकों को सख़्त चेतावनी दी है। विभाग ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को अधिकतम तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इस संदर्भ में विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल कनेक्शन और पहचान दस्तावेजों को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरतें और किसी अनजान व्यक्ति या संस्था को अपना आधार, पैन या अन्य दस्तावेज़ उपयोग करने न दें।
छत्तीसगढ़ में सामने आए एक मामले में, एक प्वाइंट‑ऑफ़‑सेल (POS) एजेंट ने नागरिकों की जानकारी या सहमति के बिना उनके पहचान दस्तावेज़ों का प्रयोग कर 25 सिम कार्ड जारी कर दिए। इस जानकारी के प्रकाश में संबंधित एजेंट को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और उसके माध्यम से आगे कोई भी मोबाइल कनेक्शन जारी करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। दूरसंचार विभाग ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म (DIP) के माध्यम से इन 25 मोबाइल नंबरों की गहन जांच की, जहाँ यह स्पष्ट हुआ कि कई मामलों में दस्तावेज़ों का अनधिकृत उपयोग किया गया था।
विभाग ने विशेष रूप से उन मोबाइल फ़ोन, मॉडेम, मॉड्यूल, सिम बॉक्स और अन्य दूरसंचार उपकरणों से बचने की सलाह दी है जिनके आईएमईआई नंबर में परिवर्तन या छेड़छाड़ की गई हो। साथ ही, झूठे या जाली दस्तावेज़ों के माध्यम से सिम कार्ड हासिल करने से भी नागरिकों को दूर रहना चाहिए। अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन की नियमित जांच करने के लिए ‘संचार साथी’ पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा सकता है, जिससे किसी भी अनधिकृत नंबर की तुरंत रिपोर्ट की जा सके।
अंत में, विभाग ने दोहराया कि अपने नाम पर जारी सिम को किसी अन्य व्यक्ति को बेचना या उपयोग के लिए देना कानूनी समस्याएँ पैदा कर सकता है, विशेषकर यदि वह कनेक्शन अवैध गतिविधियों में प्रयोग हो। नागरिकों से अनुरोध है कि वे अपने मोबाइल कनेक्शन और पहचान दस्तावेज़ों का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करें और समय‑समय पर अपने सिम की स्थिति की जाँच करते रहें।
Original Title: SIM कार्ड को लेकर सरकार का बड़ा अलर्ट, ये गलती की तो 3 साल जेल और 50 लाख का लगेगा जुर्माना
Original Content: SIM Fraud | Telecom Department | Sanchar Saathi : मोबाइल सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल और आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ को लेकर दूरसंचार विभाग ने नागरिकों को सतर्क किया है। विभाग ने सिम के दुरुपयोग को गंभीर मामला बताते हुए लोगों से अपने मोबाइल कनेक्शन और पहचान दस्तावेजों को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।
दूरसंचार विभाग के मुताबिक नियमों का उल्लंघन करने पर तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था को अपने पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल मोबाइल कनेक्शन लेने के लिए न करने दें।
विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ में सिम कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया। इसमें एक प्वाइंट ऑफ सेल यानी पीओएस एजेंट ने नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का उनकी जानकारी या सहमति के बिना इस्तेमाल करके 25 मोबाइल सिम जारी कर दिए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित पीओएस एजेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। साथ ही उसके माध्यम से आगे मोबाइल कनेक्शन जारी करने पर रोक लगा दी गई।
दूरसंचार विभाग ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म यानी डीआईपी के जरिए इन 25 मोबाइल नंबरों की जांच की। जांच में ऐसे मामले सामने आए…जहां नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का कथित तौर पर उनकी जानकारी या सहमति के बिना इस्तेमाल किया गया था।
दूरसंचार विभाग ने लोगों को ऐसे मोबाइल फोन, मॉडम, मॉड्यूल, सिम बॉक्स या दूसरे दूरसंचार उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है….जिनके आईएमईआई नंबर में बदलाव या छेड़छाड़ की गई हो।
इसके साथ ही लोगों से जाली दस्तावेजों या धोखाधड़ी के जरिए सिम कार्ड हासिल करने से भी बचने को कहा गया है।
विभाग ने नागरिकों से अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की नियमित जांच करने की अपील की है। इसके लिए संचार साथी पोर्टल और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस सेवा के जरिए लोग अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की जानकारी देख सकते हैं। अगर कोई ऐसा नंबर दिखाई देता है जिसे उन्होंने जारी नहीं कराया है…..तो उसकी शिकायत भी की जा सकती है।
दूरसंचार विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि अपने नाम पर जारी मोबाइल सिम किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना या बेचना कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। खासतौर पर अगर उस कनेक्शन का किसी गैरकानूनी गतिविधि में इस्तेमाल होता है…तो सिम धारक के लिए भी परेशानी खड़ी हो सकती है।
विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल कनेक्शन और पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल सावधानी से करें और समय-समय पर अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की जांच करते रहें।
