उत्तराखंड सरकार ने अपने निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 10,709 लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे डीबीटी (डिजिटल बैंक्स ट्रांसफर) के माध्यम से कुल 18.49 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजी। इस हस्तांतरण में प्रसूति एवं प्रसविधा सहायता के 95 लाभार्थी, मृत्युपरांत सहायता के 177 लाभार्थी, पुत्री विवाह सहायता के 2,354 लाभार्थी और शिक्षा सहायता के 8,083 लाभार्थी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “निर्माण श्रमिक राज्य के विकास में अभिन्न भूमिका निभाते हैं; उनका स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।”
बैठक में उत्तराखंड भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने भी विभिन्न कल्याण योजनाओं की प्रगति पर प्रकाश डाला। अब तक 33,429 शिक्षण सामग्री किट, 26,674 स्वच्छता सामग्री किट और 23,216 पोषाहार किट वितरित कर कुल 83,319 किट श्रमिक परिवारों तक पहुँचाए जा चुके हैं। श्रमिक स्वास्थ्य योजना के तहत 20,527 स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और 2,32,281 स्वास्थ्य परीक्षण किए गए, जिससे संभावित रोगों की पहचान हो सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि केवल जांच तक सीमित न रहकर, रोग पहचान होने पर तुरंत उपचार की व्यवस्था भी स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सुनिश्चित की जाए।
धामी ने यह भी कहा कि त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ सभी विभागों को जनसुविधा और जनसेवा को और अधिक प्रभावी बनाना चाहिए। उन्होंने श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, परिवारों के पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए। साथ ही, योजनाओं की पात्रता सत्यापन, जिलेवार लाभार्थियों की कवरेज की नियमित निगरानी और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले योग्य श्रमिकों को किसी भी योजना से वंचित न रहने की प्रतिबद्धता पर बल दिया।
बैठक में Labour Cess Collection Management System (LCCMS) की प्रगति पर भी चर्चा हुई। इस डिजिटल प्रणाली को 2025 में ई‑गवर्नेंस श्रेणी में SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया था और भारत सरकार ने इसे Best Practices Compendium में शामिल किया है। अधिकारियों का मानना है कि LCCMS के माध्यम से श्रमिक कल्याण और लेबर सेस संग्रह दोनों को पारदर्शी, समयबद्ध और डिजिटल रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे राज्य में श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा तंत्र को नई दिशा मिली है।
