📅 Saturday, 07 November 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
होम » खबरनामा » दीपावली की भावनाओं की आड़ में देहरादून रेलवे स्टेशन पर अफरातफरी: राप्ती गंगा एक्सप्रेस में पैर रखने की जगह न होने का खतरनाक नजारा

दीपावली की भावनाओं की आड़ में देहरादून रेलवे स्टेशन पर अफरातफरी: राप्ती गंगा एक्सप्रेस में पैर रखने की जगह न होने का खतरनाक नजारा

दीपावली के त्योहार को लेकर घर जाने की जल्दबाजी ने देहरादून रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों को इस वर्ष एक खतरनाक स्थिति में बदल दिया है, जहाँ सुरक्षा की चिंताओं ने उजाले की रोशनी को मात दे दिया। गुरुवार की दोपहर को, पूर्वांचल और बिहार की ओर प्रस्थान कर रही ट्रेनों के लिए यात्रियों की भारी भीड़ ने ऐसी तस्वीर पेश की जिसमें न केवल यात्रा का आनंद, बल्कि जान का खतरा भी सामने आ गया। जब ट्रेनें प्लेटफार्म पर रुकीं, तो सीटें पाने के लिए उत्साहित यात्रियों ने कोचों की तरफ दौड़ लगाई, जिससे धक्का-मुक्की और आपसी टक्करों ने स्थिति को गंभीर बना दिया। प्लेटफार्म पर इतनी भीड़ उमड़ी कि यात्रियों के लिए पैर फैलाने का स्पेस भी अत्यंत सीमित हो गया, जिससे किसी भी अनियंत्रित हादसे की संभावनाएं बढ़ गईं।

सबसे भयानक स्थिति राप्ती गंगा एक्सप्रेस के दौरान देखी गई, जहाँ जनरल कोचों की ओर से पहले से ही भरी हुई डिब्बों में चढ़ने के लिए यात्रियों ने एक-दूसरे को पीछे करने की कोशिश की। कोच के दरवाजों पर इतनी भीड़ जमा रही कि भीतर का दबाव इतना अधिक हो गया कि किसी यात्री के गिरने या चोटिल होने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया। इससे पहले, दोपहर 12:45 बजे सूबेदारगंज जाने वाली लिंक एक्सप्रेस में सवार होने के लिए भी यात्रियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी, और जब करीब डेढ़ बजे ट्रेन रवाना हुई, तो भीड़ में कोई कमी नहीं आई। इसके बाद 2:17 बजे राप्ती गंगा एक्सप्रेस के पहुंचते ही स्थिति और भी असाहनीय हो गई, जहाँ यात्रियों को कोच के अंदर प्रवेश करने में ही परेशानी का सामना करना पड़ा।

इस भीड़भाड़ वाली स्थिति में सबसे अधिक प्रभावित महिला यात्रियों और बालिकाओं को रखा गया, जिनके लिए भीड़ के दबाव में ट्रेन के डिब्बों तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया। इस संवेदनशील स्थिति में, जनरल रेलवे पुलिस (जीआरपी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाला। उन्होंने न केवल भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया, बल्कि विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित तरीके से कोच तक पहुंचाने और ट्रेन में चढ़ने में मदद की, जिससे किसी बड़े आघात या दुर्घटना की आशंका को टाला जा सका।

हालांकि, यह घटना दीपावली और छठ पर्व जैसे बड़े त्योहारों के दौरान रेलवे तैयारियों की कमी को उजागर करती है। हर साल इन अवसरों पर पूर्वांचल और बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि देखी जाती है, फिर भी जनरल कोचों में क्षमता से अधिक यात्रियों को सवार होने दिया जाता है, जिससे यात्रा न केवल कठिनाई भरी हो जाती है, बल्कि सुरक्षा का जोखिम भी बढ़ जाता है। विशेष ट्रेनों की चालूकरण, अतिरिक्त कोचों की व्यवस्था और स्टेशन पर बेहतर भीड़ नियंत्रण के उपायों की अत्यंत आवश्यकता है, ताकि त्योहारों के मौसम में यात्रियों को घर पहुंचने के लिए ऐसी जोखिम भरी और बेहद अनोखी स्थितियों का सामना न करना पड़े।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।