उत्तराखंड के जौनसार‑बावर क्षेत्र के बुल्हाड़ गांव की निवासी शर्मिला ने अपनी शादी के बाद ससुराल उदावा गांव तक लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की, जिससे वह और उनके साथियों को ढाई घंटे का कठिन सफर तय करना पड़ा। यह अनोखी बारात, जो स्थानीय “जोजोड़ा” परंपरा के तहत दूल्हे के घर तक दुल्हन को ले जाती है, में साधारण तौर पर गाड़ियों का उपयोग किया जाता है, परंतु उदावा गांव तक कोई सड़क नहीं होने के कारण यह कदम अनिवार्य हो गया। शर्मिला ने अपने पति अनिल के साथ इस परम्परा को निभाते हुए, अपने परिवार और गांव के लोगों के साथ इस कठिन यात्रा को पूरा किया, जिससे ग्रामीणों में बुनियादी बुनियादी ढांचे की कमी पर फिर से सवाल उठे।
शादी के बाद उदावा गांव तक पहुंचने में सड़क के अभाव ने न केवल दुल्हन को, बल्कि पूरे समुदाय को दैनिक जीवन की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुँच में भी इस तरह की बुनियादी कमी बाधा बनती है। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की नजर में इस क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता को दोबारा उजागर किया। कई ग्रामीणों ने कहा कि यदि सड़क नहीं बनी, तो भविष्य में भी ऐसे कई सामाजिक और आर्थिक कार्यों में बाधा आएगी।
शर्मिला ने इस अवसर का उपयोग करके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक मोटर मार्ग बनवाने की मांग की। उनका तर्क है कि सड़क निर्माण से न केवल दुल्हनों और दूल्हों की बारात में सुविधा होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों, आपातकालीन सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी आसान पहुँच मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से गांव के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुँचने में मदद मिलेगी, जिससे ग्रामीण विकास में तेजी आएगी।
जौनसार‑बावर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जोजोड़ा जैसी अनूठी परंपराओं को देखते हुए, इस क्षेत्र में बुनियादी बुनियादी ढांचे की कमी का सवाल अब और अधिक तात्पर्यपूर्ण हो गया है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों से उम्मीद है कि वे इस मांग को गंभीरता से लेंगे और जल्द ही उदावा गांव तक सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। इस प्रकार, शर्मिला की बारात न केवल एक प्रेम कथा बन गई, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण सामाजिक आंदोलन का भी रूप ले ली है।
Original Title: बारात लेकर 8 किमी पैदल चली उत्तराखंड की दुल्हन, सीएम धामी से लगाई गुहार
Original Content: Uttarakhand News | Chakrata News : Bride Walks 8Km : CM Dhami : उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में एक शादी इन दिनों खास वजह से चर्चा में है। यहां बुल्हाड़ गांव की रहने वाली शर्मिला को शादी के बाद अपने ससुराल उदावा गांव पहुंचने के लिए करीब 8 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। यह सफर तय करने में उन्हें लगभग ढाई घंटे लगे। वजह थी उदावा गांव तक सड़क का न होना।
शर्मिला की शादी उदावा गांव के अनिल के साथ हुई है। जौनसार-बावर की पारंपरिक जोजोड़ा’ विवाह परंपरा में दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर जाती है। इसी रस्म को निभाते हुए शर्मिला अपने परिजनों और ग्रामीणों के साथ पैदल ससुराल पहुंचीं।
शादी के मौके पर जहां आमतौर पर लोग वाहनों से दूल्हा-दुल्हन को घर तक पहुंचाते हैं वहीं उदावा गांव में सड़क संपर्क नहीं होने के कारण शर्मिला और उनके साथ आए लोगों को पैदल रास्ता तय करना पड़ा। करीब 8 किलोमीटर के इस सफर में लगभग ढाई घंटे लगे।
यह घटना एक बार फिर पहाड़ी गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की जरूरत को सामने लाती है। सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को केवल शादी-विवाह ही नहीं….बल्कि रोजमर्रा के कामों और जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में भी परेशानी होती है।
शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक मोटर मार्ग बनवाने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव तक सड़क पहुंचने से स्थानीय लोगों को आने-जाने में राहत मिलेगी और जरूरी कामों के लिए होने वाली दिक्कतें भी कम होंगी।
ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क बेहतर होने से लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में मदद मिलती है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि उदावा गांव तक सड़क पहुंचाने की मांग पर संबंधित विभाग ध्यान देगा।
जौनसार-बावर अपनी अलग संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। जोजोड़ा भी इसी क्षेत्र की पारंपरिक विवाह रस्मों में शामिल है। लेकिन शर्मिला की शादी के दौरान सामने आई परेशानी ने यह सवाल भी उठाया है कि दूरस्थ गांवों तक सड़क जैसी जरूरी सुविधाएं कब पहुंचेंगी।
फिलहाल शर्मिला ने मुख्यमंत्री से सड़क निर्माण की गुहार लगाई है। अब देखना होगा कि उनकी मांग पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
