चुनाव आयोग द्वारा “शुद्ध” वोटर लिस्ट तैयार करने के बाद जब नई पंजीकरण पुस्तिका जनता के हाथों में आई, तो उम्मीदें ऊँची थीं। पर पन्ने पलटते ही हँसी का सिलसिला शुरू हो गया, क्योंकि लिस्ट में ऐसे नाम, लिंग और पारिवारिक विवरण भरे हुए हैं जो न तो तर्कसंगत हैं और न ही वास्तविक। यह विचित्रता सिर्फ एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं रही; पिथौरागढ़ के 44वें विधानसभा क्षेत्र से लेकर रुद्रपुर के 66वें क्षेत्र तक, हर कोने में अजीबोगरीब एंट्रीज़ पाई गईं।
रुद्रपुर के ट्रांजिट कैम्प वार्ड 2 में क्रम संख्या 601 पर “शंकर कश्यप” नाम की एक महिला दर्ज है, जिनकी आयु 39 वर्ष बताई गयी है, परंतु लिंग ‘महिला’ लिखा है। इस एंट्री में पति का नाम भी “यामीन खान” दिया गया है। ऐसे मिश्रण से न केवल मतदाता भ्रमित होते हैं, बल्कि चुनाव के दिन पोलिंग अधिकारी को पहचानने में भी मुश्किल होती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के 44वें क्षेत्र में क्रम संख्या 233 पर “पिथौरागढ़ पिथौरागढ़” नाम की 21 वर्षीय महिला पंजीकृत है, जिनका पिता भी “पिथौरागढ़ पिथौरागढ़” और मकान संख्या “पिथौरागढ़” है। यह स्पष्ट है कि डेटा एंट्री ऑपरेटर ने हर खाली फ़ील्ड में स्थान का नाम भरा है, जिससे एक ही नाम के तीनों हिस्से एक साथ मिल गए।
इसी प्रकार क्रम संख्या 322 पर “जागती कॉलोनी जागती कॉलोनी” नाम की 50 वर्षीय महिला पंजीकृत है, जिनका नाम, पति का नाम और मकान संख्या तीनों ही “जागती कॉलोनी” हैं। यह नामकरण एक पूरी कॉलोनी का प्रतिनिधित्व करता दिखता है। आगे क्रम संख्या 556 पर “इंडियन इंडियन” नाम की 30 वर्षीय महिला पंजीकृत है, जिनका पति का नाम भी “इंडियन इंडियन” और मकान संख्या “इंडियन” है। अगली क्रम संख्या 559 पर चंदा वर्मा नाम की महिला पंजीकृत है, जिनके पति का नाम “इंडियन इंडियन” है, जो एक और अनोखा उदाहरण है।
इन गड़बड़ियों के बावजूद, चुनाव आयोग ने स्वयं को “शुद्ध” वोटर लिस्ट तैयार करने का दावा किया है। लाखों रुपये खर्च कर, महीनों तक सर्वेक्षण कर, और ब्लू-लाइट ऑडिट (BLO) से गुजरने के बाद भी ऐसे नाम लिस्ट में आ गए हैं। सवाल यह उठता है कि डिजिटल युग में उपलब्ध आधुनिक सॉफ़्टवेयर और सत्यापन प्रक्रियाएँ इतनी बेतुकी एंट्रीज़ को क्यों पास कर रही हैं? क्या अंतिम जाँच केवल कागज़ पर दस्तखत करने तक सीमित है? मतदाता अब भी यह सोचकर हैरान हैं कि यदि वे “शंकर कश्यप (महिला)” या “पिथौरागढ़ पिथौरागढ़” के रूप में पोलिंग बूथ पर आएँ, तो पोलिंग अधिकारी उन्हें कैसे पहचानेंगे।
Original Title: वोटर लिस्ट में ‘पिथौरागढ़’ की बेटी ‘पिथौरागढ़’ : SIR से बनी ‘शुद्ध’ वोटर लिस्ट की अजब-गजब दास्तां !
Original Content: चुनाव आयोग की ओर से एक बड़ा दावा किया जा रहा है—‘हम वोटर लिस्ट को एकदम शुद्ध और त्रुटिहीन बना रहे हैं!’ एसआईआर (Special Intensive Revision) जैसी भारी-भरकम प्रक्रियाओं के बाद जब नई वोटर लिस्ट छपकर बाहर आई, तो जनता को लगा कि इस बार सब कुछ दुरुस्त होगा। लेकिन जब लोग लिस्ट के पन्ने पलटते हैं, तो उनकी हंसी रोके नहीं रुक रही! ‘शुद्धीकरण’ के इस खेल की जो बानगी सामने आई है, वह सरकारी तंत्र की मुस्तैदी और लापरवाही का ऐसा नमूना है जिसे देखकर कोई भी अपना सिर धुन ले।
रुद्रपुर में ‘शंकर कश्यप’ बनीं महिला, पति का नाम ‘यामीन खान’!
सबसे पहला और मजेदार कारनामा देखने को मिला है विधानसभा क्षेत्र संख्या 66 — रुद्रपुर (सामान्य) के अनुभाग ‘ट्रांजिट कैम्प वार्ड 2’ में। यहाँ क्रम संख्या 601 पर एक वोटर दर्ज हैं—नाम: शंकर कश्यप। अब आप सोचेंगे कि शंकर जी तो पुरुष होंगे? जी नहीं, लिस्ट के मुताबिक शंकर कश्यप की आयु 39 वर्ष है और उनका लिंग ‘महिला’ लिखा गया है! इतना ही नहीं, शंकर कश्यप जी के पति का नाम ‘यामीन खान’ दर्ज किया गया है। यानी एक ही एंट्री में नाम, लिंग और पारिवारिक रिश्ते का ऐसा खिचड़ी-मिश्रण बनाया गया है कि खुद शंकर जी भी भ्रम में पड़ जाएं कि वोट डालने जाना है या पहले अपना परिचय पत्र सही कराना है!
पिथौरागढ़ में शहर ही बना वोटर, पिता भी ‘पिथौरागढ़’, मकान भी वही!
अब जरा चलिए उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ी जिले पिथौरागढ़ की तरफ। विधानसभा क्षेत्र संख्या 44 — पिथौरागढ़ की वोटर लिस्ट तो एक कदम और आगे निकल गई है।
यहाँ क्रम संख्या 233 पर दर्ज वोटर का विवरण देखिए:
नाम: पिथौरागढ़ पिथौरागढ़
पिता का नाम: पिथौरागढ़ पिथौरागढ़
मकान संख्या: पिथौरागढ़
आयु: 21 वर्ष, लिंग: महिला
जी हाँ! किसी डेटा एंट्री ऑपरेटर ने शायद दिमाग लगाने की ज़हमत ही नहीं उठाई और फॉर्म भरने के दौरान हर खाली डिब्बे में जगह का नाम ‘पिथौरागढ़’ ही ठोक दिया! 21 साल की ‘पिथौरागढ़’ देवी जी के पिता भी पिथौरागढ़ हैं और वह रहती भी पिथौरागढ़ मकान में ही हैं।
इसी तरह क्रम संख्या 322 पर एक और मतदाता साक्षात प्रकट हुई हैं—‘जागती कॉलोनी जागती कॉलोनी’। इनका नाम, पति का नाम और मकान संख्या तीनों ही ‘जागती कॉलोनी’ दर्ज कर दिए गए हैं। 50 साल की यह महिला मानो पूरी कॉलोनी का प्रतिनिधित्व अकेले अपने नाम में लेकर घूम रही हैं!
देशभक्ति का अनोखा रूप: ‘इंडियन इंडियन’ जी की एंट्री!
गड़बड़ियों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमता। एक अन्य सूची (क्रम संख्या 556) में तो अति-देशभक्ति का दुर्लभ नजारा देखने को मिला है।
यहाँ वोटर का नाम लिखा है—‘इंडियन इंडियन’! उनके पति का नाम भी ‘इंडियन इंडियन’ है और मकान संख्या भी ‘इंडियन’ दर्ज है। 30 साल की इस महिला वोटर को देखकर लगता है कि फॉर्म भरवाने वाले कर्मचारी ने कॉलम खाली न छोड़ने की कसम खाई थी और जो मन में आया, टाइप कर दिया। यही नहीं, अगली ही क्रम संख्या (559) पर चंदा वर्मा नाम की महिला दर्ज हैं, जिनके पति का नाम भी ‘इंडियन इंडियन’ लिख दिया गया है।
कागजों पर ‘शुद्धि’, जमीन पर गफलत!
लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करके, महीनों अभियान चलाकर और बीएलओ (BLO) से घर-घर सर्वे कराकर जो ‘शुद्ध’ वोटर लिस्ट तैयार की जाती है, उसकी ज़मीनी हकीकत इन तस्वीरों में साफ झलकती है।
सवाल यह उठता है कि जब डिजिटल दौर में डेटा वेरीफाई करने के लिए इतने आधुनिक सॉफ्टवेयर मौजूद हैं, तब ऐसे बेतुके और भ्रामक नाम लिस्ट में कैसे पास हो जाते हैं? क्या अधिकारियों की फाइनल चेकिंग केवल फाइलों पर दस्तखत करने तक ही सीमित रहती है?
खैर, मतदाता तो अब भी यह सोचकर हैरान हैं कि चुनाव के दिन अगर ‘शंकर कश्यप (महिला)’ या ‘पिथौरागढ़ पिथौरागढ़’ पोलिंग बूथ पर वोट डालने पहुंचे, तो पोलिंग अफसर उनका चेहरा देखकर पहचानेंगे कैसे!
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