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तीन दृष्टिबाधित भाइयों‑बहनों को बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार: उत्तराखंड की संगीत कथा

कोटद्वार के द्वारीखाल के भीतर और गूमखाल के पास स्थित ग्राम कोटलमंडा के तीन दृष्टिबाधित दिव्यांग भाई‑बहन — निर्मल, मुकेश और अंजलि अनुरागी — ने 2025 में लोक संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित **उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार** प्राप्त किया। यह मानद सम्मान संगीत‑नाटक अकादमी द्वारा आयोजित किया गया और यह न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का साक्ष्य है, बल्कि उत्तराखंड के समावेशी सांस्कृतिक परिदृश्य की भी पुष्टि करता है।

सामाजिक कार्यकर्ता **चन्द्रमोहन जदली** ने बताया कि सुप्रसिद्ध कवि और संस्कृति प्रेमी **किशना बगोट** ने कई वर्षों से अनुरागी बन्धुओं की संगीत व गायन की प्रतिभा को निखारने के लिये अथक प्रयास किये हैं। किशना ने उन्हें देहरादून में विशेष संगीत प्रशिक्षण के लिये भेजा और उनके मंच अनुभव को बढ़ाने हेतु देहरादून के संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम को सामाजिक कार्यकर्ता **रघुबीर बिष्ट** के सहयोग से संभव बनाया गया।

किशना बगोट ने अनुरागी बन्धुओं के लिए अपनी रचित शानदार गीतों की संगीतबद्ध रिकॉर्डिंग भी करवाई और इन्हें यूट्यूब चैनल पर प्रसारित कराया, जहाँ ये अत्यधिक लोकप्रिय हुए। निर्मल, मुकेश और अंजलि के इन गीतों ने उत्तराखंड के दर्शकों के बीच एक नया सजीव ध्वनि पैदा किया, जिससे वे राज्य के सांस्कृतिक मंच पर चर्चित हो गये।

इसके अतिरिक्त, **माता मंगला देवी** और **भोले महाराज** द्वारा संचालित **हंस फाउंडेशन** ने अनुरागी बन्धुओं को कई वर्षों से पेंशन सहायता प्रदान की है। पूर्व मुख्यमंत्री **त्रिवेंद्र रावत** ने भी कई मंचों पर उन्हें सम्मानित किया और उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया। इस प्रकार, तीन दृष्टिबाधित कलाकारों ने न केवल अपनी कला से समाज को प्रेरित किया, बल्कि उत्तराखंड की समावेशी सांस्कृतिक पहचान को भी समृद्ध किया।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

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