केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) की वेतन सीमा में महत्वपूर्ण सुधार किया है, जिससे अब पेंशन कटौती के लिए मासिक वेतन की सीमा 15 हज़ार रुपये से बढ़ाकर 25 हज़ार रुपये कर दी गई है। इस परिवर्तन से 25 हज़ार रुपये तक की आय वाले लाखों कर्मचारियों को पीएफ के साथ‑साथ कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) का लाभ मिलेगा। उत्तराखंड में 40 हज़ार से अधिक कर्मचारियों को अब इस सामाजिक सुरक्षा जाल में शामिल होने की उम्मीद है, जो पहले वेतन सीमा के कारण EPFO के दायरे से बाहर थे।
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त वीवीबी सिंह के अनुसार, इस नीति परिवर्तन के बाद पूरे देश में लगभग 51 लाख नए अंशधारकों के EPFO से जुड़ने की संभावना है। कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी पहले से ही निर्धारित पीएफ वेतन सीमा से अधिक थी, जिससे कई कामगार अनजाने में सुरक्षा व्यवस्था से बाहर रह जाते थे। नई सीमा के लागू होने से इन कर्मचारियों को नियमित पीएफ अंशदान के साथ पेंशन सुरक्षा भी प्राप्त होगी, जो भविष्य में आर्थिक स्थिरता का भरोसा देगा।
देहरादून में EPFO ने सामाजिक सुरक्षा के दायरे को विस्तृत करने के साथ-साथ रोजगार को औपचारिक बनाने और नियमों के पालन को सुदृढ़ करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत गढ़वाल क्षेत्र में पहली किस्त के दौरान पात्र कर्मचारियों और नियोक्ताओं को लगभग 19 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, EPFO की विश्वास योजना के तहत देयकों की देर से भुगतान से जुड़ी 54 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी कुल राशि लगभग 70 लाख रुपये है।
इन सबके बीच EPFO ने “कर्मचारी नामांकन अभियान‑2026” भी लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य अभी तक सुरक्षा जाल से बाहर रहे योग्य कर्मचारियों को EPFO में शामिल करना है। नियोक्ताओं को इस अभियान के तहत पूर्व प्रभाव से कर्मचारियों का नामांकन कराने का अवसर दिया गया है, जो 31 अक्टूबर तक सीमित रहेगा। इस पहल से न केवल कर्मचारियों को भविष्य की पेंशन सुरक्षा मिलेगी, बल्कि नियोक्ताओं को भी सामाजिक सुरक्षा नियमों का पालन करने में सुविधा होगी।
Original Title: खुशखबरी! ईपीएफओ ने बढ़ाई वेतन सीमा, उत्तराखंड में हजारों कर्मचारियों को मिलेगा पेंशन का सुरक्षा कवच
Original Content: EPFO | PF Pension | Uttarakhand Employees : उत्तराखंड में 40 हजार से ज्यादा ऐसे कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि यानी पीएफ और पेंशन व्यवस्था से जुड़ने का मौका मिलने की उम्मीद है….जो अब तक वेतन सीमा के कारण कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से बाहर थे।
केंद्र सरकार की ओर से कर्मचारी भविष्य निधि के लिए वेतन सीमा में बदलाव किया गया है। अब पेंशन कटौती के लिए मासिक वेतन की सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इससे 25 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों को पीएफ के साथ कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस का लाभ मिल सकेगा।
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त वीवीबी सिंह के अनुसार, देशभर में इस बदलाव के बाद करीब 51 लाख नए अंशधारकों के ईपीएफओ से जुड़ने की उम्मीद है। नई व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों के नियमित पीएफ अंशदान के साथ उन्हें पेंशन से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा भी मिल सकेगी।
ईपीएफओ के मुताबिक कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी पहले से ही निर्धारित पीएफ वेतन सीमा से अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी ईपीएफओ की सदस्यता से बाहर रह जाते थे। वेतन सीमा बढ़ाए जाने से ऐसे कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होने का रास्ता खुलेगा।
नियमित पीएफ अंशदान से कर्मचारियों को भविष्य के लिए बचत और आर्थिक सुरक्षा का आधार भी मिलेगा। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने पात्र कर्मचारियों को ईपीएफ के दायरे में लाने और नियमों के अनुसार अंशदान जमा कराने पर जोर दिया है।
ईपीएफओ देहरादून की ओर से सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के साथ रोजगार को औपचारिक बनाने और नियमों के पालन को बेहतर करने के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। इनमें प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना भी शामिल है।
इस योजना का उद्देश्य नए रोजगार के अवसर बढ़ाना और नए कर्मचारियों को संगठित क्षेत्र के कार्यबल तथा सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। गढ़वाल क्षेत्र में योजना की पहली किस्त के दौरान पात्र कर्मचारियों और नियोक्ताओं को करीब 19 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
ईपीएफ देयकों के देरी से भुगतान से जुड़े मामलों के समाधान के लिए ईपीएफओ की विश्वास योजना भी लागू की गई है। देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय को इस योजना के तहत अब तक करीब 70 लाख रुपये की राशि से जुड़े 54 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
ईपीएफओ की ओर से कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 भी चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र कर्मचारियों को ईपीएफ के सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करना है…जो अब तक इसके दायरे से बाहर हैं।
इस अभियान के तहत नियोक्ताओं को ऐसे कर्मचारियों का पूर्व प्रभाव से नामांकन कराने का अवसर दिया जा रहा है। यह सुविधा सीमित अवधि के लिए है और अभियान 31 अक्टूबर तक उपलब्ध रहेगा।
