उत्तराखंड हाईकोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण फेरबदल हुआ है, जिसे भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय (न्याय विभाग) की अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लागू किया गया है। 9 अक्टूबर 2026 से प्रभावी, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। यह निर्णय केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव जगन्नाथ श्रीनिवासन द्वारा 6 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के आधार पर लिया गया है।
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता का 8 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्ति हो रही है। उनकी जगह तिवारी को नियुक्त करके हाईकोर्ट के न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनाए रखने की उम्मीद की जा रही है। तिवारी जी ने पहले भी उत्तराखंड हाईकोर्ट में वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में सेवा दी है, जिससे उन्हें न्यायालय के कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं की गहरी समझ है। उनकी यह नियुक्ति हाईकोर्ट के लिए एक स्थिर और अनुभवी नेतृत्व सुनिश्चित करती है।
साथ ही, उत्तराखंड हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जस्टिस सुभाष उपाध्याय के स्थायी न्यायाधीश बनने का मार्ग भी खुल गया है। 30 मई 2025 को शपथ ग्रहण करने के बाद, कॉलेजियम की मंजूरी मिलने के पश्चात उनकी नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उपाध्याय जी का जन्म 12 दिसंबर 1972 को हुआ और उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और एमएसडब्ल्यू की शिक्षा प्राप्त की। 1998 में वकालत शुरू करने के बाद, उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में और बाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट में सिविल, संवैधानिक और सेवा संबंधी मामलों में लंबी अवधि तक पैरवी की।
यह प्रशासनिक फेरबदल उत्तराखंड हाईकोर्ट की कार्यवाही में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। तिवारी और उपाध्याय दोनों की नियुक्तियाँ न्यायालय के भीतर अनुभव और विशेषज्ञता को आगे बढ़ाने के साथ ही न्यायिक प्रणाली में संतुलन और स्थिरता बनाए रखने का संकेत देती हैं।
