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जैनी का नया दावा: हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का आरोप, DGP से CBI जांच और DNA टेस्ट की मांग

उत्तराखंड की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में बार-बार सुर्खियों में आने वाली जैनी प्रकरण ने एक नई और गंभीर मोड़ पकड़ लिया है। इस मामले में देहरादून पहुंची जैनी ने एक प्रेस वार्ता का आयोजन करते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस वार्ता के दौरान भावुक दिखी जैनी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई और आरोप लगाया कि हरक सिंह रावत ने उनके साथ दुष्कर्म किया था। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि घटना के समय वह सिर्फ 16 वर्ष की उम्र में थीं और देहरादून में रह रही थीं। यह दावा पिछले कुछ वर्षों से चल रहे इस विवादित मामले में एक नया आयाम जोड़ता है, जिसने फिर से पोस्टलियर और जनता के बीच चर्चाओं को भड़का दिया है।

जैनी के अनुसार, मामले की जांच में गंभीरता नहीं बरती गई और उन्हें जानबूझकर कठिनाइयों का सामना कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें गर्ल्स हॉस्टल में रखने के बहाने किसी मानसिक चिकित्सालय में दाखिल करवाया गया, जहां उन्हें डराया-धमकाया गया। जैनी का कहना है कि उस समय उन पर मानसिक रूप से अत्यधिक उत्पीड़न किया गया था, जिसके बाद उन्हें देहरादून से बाहर भेज दिया गया, जिससे वह अपनी लड़ाई जारी रखने से वंचित हो गईं। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि हरक सिंह रावत ने उन्हें कई बार मसूरी घुमने के लिए मधुबन होटल ले जाया था, जहां उन्हें अलग-अलग अवसरों पर मिला। जैनी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में उनका मानसिक स्थायी रूप से प्रभावित हुआ है और उन्हें न्याय दिलवाने के लिए उन्हें अकेले लड़ना पड़ा है।

अपनी मांगों के तौर पर जैनी ने उत्तराखंड के डिप्टी जनरल (DGP) से सीधे अपील की है कि इस मामले की दोबारा से CBI (केंद्रीय अपराध ब्यूरो) की जांच कराई जाए और विस्तृत DNA टेस्ट कराया जाए ताकि सच बाहर आ सके। इसके अलावा, उन्होंने हरक सिंह रावत से नार्को टेस्ट (Narco Test) कराने की भी मांग उठाई है, ताकि उनके दावों की पुष्टि या खंडन किया जा सके। जैनी ने राज्य के मुख्यमंत्री धामी से भी मुलाकात के लिए समय मांगा है, ताकि वे इस मामले में अपना ध्यान आकर्षित कर सकें और न्याय की प्रक्रिया को गति प्रदान कर सकें।

जैनी ने इस प्रेस वार्ता में अपने व्यक्तिगत और सामाजिक अधिकारों के संघर्ष को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को उसके पिता का नाम और वैध अधिकार मिलना चाहिए, जो उसे कानूनी पहचान और सामाजिक स्थिति प्रदान करेगा। जैनी ने गंभीरता से वचन दिया है कि वह अपने बच्चे को उसका हक दिलाकर ही रहेंगी, चाहे इसके लिए कितनी भी मशक्कत करनी पड़े। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत आपबीती है, बल्कि यह राजनीतिक शक्ति, कानूनी प्रक्रिया और महिला अधिकारों के संघर्ष का एक जटिल उदाहरण है, जिसका निपटारा अब सभी की नज़रों में है।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।