Karwa Chauth 2026 के उपलक्ष्य में, उत्तराखंड के सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए दिनभर उपवास रखती हैं। दिन के अंत में, वे शाम की पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन के क्षण तक प्रतीक्षा करती हैं, जब ही वे अपना व्रत खोलती हैं। इस पवित्र दिन में चंद्रमा के निकलने का समय जानना महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह तय करता है कि कब पूजा करनी है और कब व्रत तोड़ना है।
उत्तरी भारत के पहाड़ी इलाकों में, चंद्रमा के निकलने का समय अलग-अलग शहरों में कुछ मिनटों का अंतर रख सकता है। चंद्रोदय के समय का अनुमानित आँकड़ा प्रकाशित चंद्रोदय सूचनाओं पर आधारित है, परंतु स्थानीय पंचांग के अनुसार भी अंतर हो सकता है। इसलिए, प्रत्येक शहर की महिलाओं को अपने क्षेत्र के पंचांग की जाँच कर समय का सही पता लगाना चाहिए।
चंद्रमा के निकलने के बाद महिलाएँ पूजा-अर्चना करती हैं, अर्घ्य देती हैं और फिर व्रत खोलती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में, ऊँची पहाड़ियों और कभी-कभी बादलों के कारण चंद्रमा का दर्शन देर से हो सकता है। ऐसे मामलों में, महिलाएँ अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय समायोजित करती हैं और धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करती हैं।
इस प्रकार, Karwa Chauth 2026 में उत्तराखंड के सुहागिन महिलाएँ अपने पति की भलाई और परिवार की समृद्धि के लिए दिनभर उपवास रखती हैं, शाम को पूजा करती हैं, और चंद्रमा के दर्शन के क्षण में व्रत खोलती हैं। चंद्रमा के निकलने का सही समय जानकर वे अपने रीतियों को समय पर और श्रद्धापूर्वक पूरा कर सकती हैं।
Original Title: Karwa Chauth 2026: उत्तराखंड में आज कितने बजे निकलेगा चांद? यहां देखें
Original Content: Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को पूजा की जाती है और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। उत्तराखंड में अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए अपने शहर में चांद निकलने का अनुमानित समय जानना जरूरी है। ये समय प्रकाशित चंद्रोदय सूचनाओं पर आधारित हैं। स्थानीय पंचांग में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। चांद निकलने के बाद महिलाएं पूजा-अर्चना कर अर्घ्य देंगी और इसके बाद व्रत खोलेंगी। पहाड़ी इलाकों में बादल या आसपास की ऊंची पहाड़ियों के कारण चांद दिखाई देने में देरी हो सकती है।
