उत्कृष्ट राजनीतिक तनाव के बीच, उत्तराखंड की राजधानी ग्यारसैंण में 17 अक्टूबर 2024 को आयोजित विधानसभा सत्र की कम अवधि पर कांग्रेस पार्टी ने धामी सरकार पर कड़ी आलोचना की। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अपने बयान में बताया कि सत्र एक दिन भी पूरा नहीं हो पाया और सरकार ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। यह कदम राज्य की जनता की भावनाओं, लोकतांत्रिक परंपराओं और ग्यारसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित करने की अवधारणा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सत्र के दौरान, केवल कुछ ही घंटे ही सदन में बिता पाये, जबकि मंत्रियों और अधिकारियों को ग्यारसैंण पहुँचाया गया और फिर तुरंत ही देहरादून लौटाया गया। गोदियाल ने इस व्यवस्था को “जनता की मेहनत की कमाई और करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग” बताया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सत्र को सीमित रखना था, तो इसे देहरादून में ही आयोजित किया जा सकता था, जिससे राज्य की जनता को अनावश्यक खर्च से बचाया जा सके।
कांग्रेस ने बताया कि विपक्ष के विधायक अंकिता भंडारी के हत्याकांड, प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अन्य सामाजिक समस्याओं पर चर्चा के लिये सरकार ने विपक्ष की मांगें स्वीकार नहीं कीं। इस अस्वीकृति से सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वह गंभीर मुद्दों का सामना करने से बच रही है।
गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया कि ग्यारसैंण केवल प्रतीकात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सरकार बनती है, तो ग्यारसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किया जाएगा और वहाँ नियमित, पर्याप्त अवधि के विधानसभा सत्र आयोजित होंगे। इस प्रकार, हर विधायक को अपने क्षेत्र की समस्याएँ उठाने का पर्याप्त अवसर मिलेगा और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना पड़ेगा।
इस घटना ने उत्तराखंड की राजनीतिक दिशा पर नई रोशनी डाली है, जहाँ ग्यारसैंण के महत्व और सरकार की पारदर्शिता पर चर्चा जारी है।
