उत्तराखंड के जोशीमठ में एक दुखद और असहज करने वाला मामला उजागर हुआ है, जहाँ 35 वर्ष के अनूप की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु ने न केवल उनके परिवार को बिखेर दिया, बल्कि आईटीबीपी (इंडियन टेररिज़्म विरोधी सीमा बल) की कार्यप्रणाली पर भी गहरा सवाल उठाया है। अनूप, दौड़ील‑ठाडो गाँव के निवासी, अपने बूढ़े नेत्रहीन पिता, वृद्ध माता, पत्नी पूजा और दो छोटे बच्चों के लिए एकमात्र कमाई करने वाले थे। अपने छोटे खेत के एक हिस्से को बेच कर उन्होंने किस्तों पर एक कमर्शियल वाहन (रजिस्ट्रेशन UK 11TA 4331) खरीदा, जिसे अक्सर आईटीबीपी के सिपाही धर्मपाल, राजस्थान के खिड़ागांव के निवासी, ले जाता था। पूर्व भुगतान और आपसी परिचय ने दोनों के बीच भरोसा बना दिया था।
सितंबर 2024 के अंत में धर्मपाल उसी वाहन से राजस्थान यात्रा पर गया, जहाँ एक गंभीर साइकिल दुर्घटना में दो सवारों की मौत हो गई और वाहन को जब्त कर लिया गया। इस घटना के बाद, अनूप पर दबाव डाला गया कि वह दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी ले ले। 7 अक्टूबर 2026 को धर्मपाल जोशीमठ वापस आया और 8‑9 अक्टूबर को अनूप से संपर्क कर कहा कि वाहन बिना मालिक के नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए उसे हस्ताक्षर करना होगा। अनूप ने अपने परिवार को फोन पर बताया कि उसे बंधक बनाकर डराया‑धमकाया जा रहा है, जबकि उसका मोबाइल भी छीन लिया गया। 12 अक्टूबर को, राजस्थान में सुनवाई के दौरान, अनूप ने अपनी 75 वर्षीय माँ बबीता देवी को बताया कि कुछ लोग उसके सिर पर बंदूक रखकर धमकी दे रहे हैं।
हड़ताल तब बढ़ी जब 16 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में अनूप का शव बरामद हुआ। आश्चर्य की बात यह थी कि अनूप की मौत से ठीक पहले धर्मपाल अपने परिवार को लगातार यह भरोसा दिला रहा था कि अनूप सुरक्षित है और वह जल्द ही जोशीमठ लौट आएगा। परिजनों ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से सिद्ध किया कि धर्मपाल और उसके सहयोगियों ने अनूप को मानसिक उत्पीड़न और धोखे की साजिश रची। आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारियों ने जब मामला सामने आया, तो इसे छुट्टी के दौरान घटित घटना बताया और विभागीय जिम्मेदारी से इनकार कर दिया।
अब अनूप के शोकाकुल परिवार को न्याय की तलाश में जोशीमठ, हरिद्वार और कई थानों के चक्कर लगाने पड़े हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे अब वाहन की किस्तें भी नहीं चुका पा रहे हैं। स्थानीय लोग और परिजन सरकार से उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच, धर्मपाल एवं उसके साथियों की तुरंत गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को पर्याप्त आर्थिक मुआवजा और वाहन की पूरी कीमत व हर्जाना वसूलने की माँग कर रहे हैं। यदि प्रशासनिक तंत्र इस मामले में शीघ्र कार्य नहीं करता, तो परिवार और स्थानीय समुदाय को न्याय की लड़ाई अदालत से लेकर सड़कों तक ले जानी पड़ेगी।
Original Title: जोशीमठ के युवा की संदिग्ध मौत और इंसाफ की आस में भटकता गरीब परिवार: सिस्टम की असंवेदनशीलता पर उठे गंभीर सवाल
Original Content: उत्तराखंड के जोशीमठ से एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां आजीविका की तलाश में निकले एक गरीब परिवार के युवा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सेना की आईटीबीपी (ITBP) व्यवस्था की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजन पिछले कई दिनों से न्याय और अपनी सुध लेने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदारों का रवैया बेहद उदासीन बना हुआ है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
प्राप्त जानकारी और मृतक अनूप की पत्नी पूजा की ओर से हरिद्वार कोतवाली में दी गई तहरीर के अनुसार, जोशीमठ के दौड़ील ठाडो गांव निवासी स्वर्गीय अनूप (आयु लगभग 35 वर्ष) अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। परिवार में उनके बूढ़े और नेत्रहीन पिता, वृद्ध माता, पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अनूप ने अपनी जमीन का एक टुकड़ा बेचकर किस्तों पर एक कमर्शियल वाहन (UK 11TA 4331) खरीदा था।
जोशीमठ आईटीबीपी में तैनात सिपाही धर्मपाल (निवासी खिड़ागांव, राजस्थान) अक्सर अनूप की गाड़ी बुक करके ले जाता था। पूर्व के भुगतानों और आपसी परिचय के चलते दोनों के बीच एक सहज भरोसा बन चुका था। सितंबर 2024 के अंत में धर्मपाल इसी गाड़ी को लेकर राजस्थान गया था, जहां उसकी ड्राइविंग के दौरान एक गंभीर दुर्घटना हो गई और स्कूटर सवार दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई। इस दुर्घटना के बाद वाहन सीज कर दिया गया।
बहला-फुसलाकर ले जाने और दबाव बनाने का आरोप
आरोप है कि अपनी सरकारी नौकरी और जुर्म से बचने के लिए सिपाही धर्मपाल ने इस पूरे गंभीर हादसे का ठीकरा वाहन स्वामी अनूप के सिर फोड़ने की साजिश रची। वह 7 अक्टूबर 2026 को जोशीमठ लौटा और 8-9 अक्टूबर को अनूप से संपर्क कर यह कहकर अपने साथ ले गया कि वाहन बिना मालिक के नहीं छूटेगा, इसलिए उसे चलकर हस्ताक्षर करने होंगे।
राजस्थान पहुँचने पर अनूप पर यह दबाव बनाया जाने लगा कि वह उक्त सड़क दुर्घटना का पूरा इल्जाम अपने ऊपर ले ले। अनूप ने फोन पर अपने घर वालों को यह जानकारी दी थी कि उसे बंधक बनाकर डराया-धमकाया जा रहा है और उसकी जान को खतरा है। इसी बीच उसका मोबाइल फोन भी उससे छीन लिया गया। 12 अक्टूबर 2026 को जब राजस्थान में इस मामले की सुनवाई थी, तब अनूप ने अपनी 75 वर्षीय माता बबीता देवी को फोन कर बताया कि कुछ लोग उसके सिर पर बंदूक रखकर उसे धमका रहे हैं।
हरिद्वार में मिला शव और गुमराह करते रहे आरोपी
हद तो तब हो गई जब 16 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में अनूप का शव (लाश) बरामद हुआ। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस समय अनूप की मौत हो चुकी थी या उसकी हत्या की जा चुकी थी, उससे ठीक पहले भी सिपाही धर्मपाल लगातार परिजनों को यह झूठा दिलासा दे रहा था कि अनूप उसके साथ सुरक्षित है और वे कल तक जोशीमठ लौट आएंगे।
परिजनों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि धर्मपाल और उसके सहयोगियों द्वारा रची गई साजिश के तहत अनूप को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। परिजनों का यह भी आरोप है कि आईटीबीपी के जिम्मेदार अधिकारियों के पास जब न्याय की गुहार लगाई गई, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि घटना छुट्टी के दौरान हुई है इसलिए विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं है और मामले को तूल न देने की बात कही।
न्याय के लिए भटकता परिवार और तीखी चेतावनी
घटना के बाद से गरीब और असहाय परिवार न्याय के लिए जोशीमठ से हरिद्वार और थानों के चक्कर काटने को विवश है। एक तरफ जवान पति को खोने का गम और दूसरी तरफ पुलिस व प्रशासनिक तंत्र की हीला-हवाली ने
