📅 Saturday, 24 October 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
होम » खबरनामा » “अंकिता भंडारी केस में नयी चाल: CBI ने जारी किया ‘नार्को टेस्ट’ और राजनीतिक गूँज”

“अंकिता भंडारी केस में नयी चाल: CBI ने जारी किया ‘नार्को टेस्ट’ और राजनीतिक गूँज”

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब जांच की सुई और गहरी होती जा रही है। 2023 के अंत में शुरू हुई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच, जिसने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया, के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। ताजा घटनाक्रम में, पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित अभिनेत्री पत्नी उर्मिला सनावर ने अपने नार्को टेस्ट के लिए लिखित सहमति दे दी है, जिससे इस हाई‑प्रोफाइल केस में एक नया मोड़ आया है।

नार्को टेस्ट, जिसे ‘सच्चाई का इंजेक्शन’ भी कहा जाता है, में सोडियम पेंटोथल जैसी दवा से व्यक्ति के अवचेतन मन को सक्रिय कर कथित साक्ष्य जुटाने की कोशिश की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2010 के सेलवी बनाम कर्नाटक राज्य के ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि बिना सहमति के नार्को टेस्ट करना असंवैधानिक है और यह अनुच्छेद 20(3) और अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति के मौन रहने के अधिकार और निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है।

कानूनी दृष्टि से, नार्को टेस्ट के दौरान दिए गए बयानों को अदालत में सीधा सबूत मानना संभव नहीं है। जज केवल ऐसे बयानों को तभी मान्यता देते हैं जब वे किसी ठोस भौतिक सबूत—जैसे हथियार, गुप्त सुराग या लापता दस्तावेज—के साथ जुड़े हों। यदि पुलिस उस जानकारी के आधार पर कोई ठोस सबूत बरामद कर लेती है, तो वह सबूत अदालत में मान्य रहता है, भले ही आरोपी बाद में अपने बयान से मुकर जाए।

सहमति की निरंतरता के प्रश्न पर, कानून के अनुसार व्यक्ति किसी भी समय अपनी सहमति वापस ले सकता है। इस तरह का ‘स्वैच्छिक सहमति’ का उलटाव दवा के ज़बरदस्ती उपयोग को मानसिक प्रताड़ना के रूप में मानता है।

मानवाधिकार संगठनों जैसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने नार्को टेस्ट को ‘तीसरी डिग्री की यातना’ के रूप में निंदा की है, और अमेरिका, यूके व यूरोपीय देशों में इसे लगभग पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।

अंकिता भंडारी मामले में पूर्व विधायक और उनकी पत्नी द्वारा नार्को टेस्ट के लिए सहमति देने के बावजूद, कानूनी वास्तविकता यह है कि केवल मौखिक बयान से किसी को सजा नहीं मिल सकती। अब सवाल यह है कि क्या इस प्रक्रिया से पुलिस या CBI को कोई ठोस, अदालत में मान्य सबूत मिलेंगे। जनता और राजनीतिक जगत दोनों की निगाहें इस हाई‑प्रोफाइल केस के आगे के विकास पर टिकी हैं।

Original Title: उत्तराखंड का चर्चित अंकिता भंडारी मामला: सीबीआई की एंट्री और नार्को टेस्ट का कानूनी पेंच

Original Content: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब जांच की सुई और गहरी होती जा रही है। मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा वीआईपी एंगल पर जांच शुरू किए जाने के बाद से राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। ताजा घटनाक्रम में, इस मामले से जुड़े पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित अभिनेत्री पत्नी उर्मिला सनावर ने अपने नार्को टेस्ट को लेकर लिखित सहमति दे दी है। …

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।