उत्तराखंड की राजनीति में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहे विवाद ने अब नए राजनीतिक मोड़ को आमंत्रित कर दिया है। इस निजी झगड़े को राष्ट्रीय स्तर पर खींचते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर अपनी एक विस्तृत पोस्ट के जरिए यह तर्क प्रस्तुत किया कि जब गिरधारी लाल साहू ने रेखा आर्य पर 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित संपत्ति अर्जित करने और विभागीय भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं, तो इस मामले की जांच में निष्पक्षता का प्रश्न उठता है। रावत का कहना है कि ऐसे गंभीर आरोपों की जांच न होना यह भ्रम पैदा करता है कि ED, CBI और आयकर विभाग जैसी एजेंसियां अपने कार्रवाई के दायरे को केवल विपक्षी नेताओं तक ही सीमित रख रही हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष के खिलाफ आरोपों की जांच में ढिलाई की जा रही है।
इस मामले को और गहराई से देखते हुए, हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी स्पष्टीकरण मांगा है। रावत ने रेखा आर्य और गिरधारी लाल साहू के बीच सामने आ रहे वीडियो क्लिप्स और आरोपों को उत्तराखंड के लिए चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यदि गिरधारी लाल साहू का यह दावा सही है कि उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर मंत्री के विभाग में भ्रष्टाचार के बारे में शिकायत दर्ज कराई थी, तो यह जानना जरूरी है कि उस पर क्या कार्रवाई हुई है। यदि यह दावा असत्य है, तो उसे आधिकारिक तौर पर खंडित करने की आवश्यकता है। रावत ने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने वाले और महत्वपूर्ण ministerial पदों पर बैठे किसी भी व्यक्ति की संपत्ति के स्रोतों का हिसाब-किताब करना लोकतंत्र की आवश्यकता है। उन्होंने अपनी ही राजनीतिक यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि सत्ता में रहने वाले व्यक्ति सख्त सत्यापन प्रक्रिया से गुजरने के लिए तैयार रहना चाहिए।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ में, रेखा आर्य और गिरधारी लाल साहू के बीच यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब केवल एक पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार की सत्ता और पारदर्शिता पर राजनीतिक दबाव का रूप ले रहा है। एक ओर जहां रेखा आर्य ने अपने पति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, वहीं दूसरी ओर साहू ने मंत्री पर कथित भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने के सवाल उठाए हैं। रेखा आर्य ने अपने पति के आरोपों को निराधार कहा है और जांच के लिए तैयार होने की बात कही है, लेकिन हरीश रावत की यह चाल इस बात पर प्रकाश डालती है कि विपक्ष अब केवल विधायिक प्रश्नोत्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह जांच एजेंसियों की नीतियों को चुनौती देने और सत्ताधारी पक्ष की संपत्ति संबंधी सवाल को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश में लगा है। यह घटनाक्रम उत्तराखंड की राजनीतिक परिदृश्य को और गरमाता हुआ देखने को मिल रहा है, जहां निजी विवाद अब सरकारी नीतियों और जांच मशीनरी की विश्वसनीयता को दरकिनार करने का माध्यम बनकर उभरा है।
