📅 Tuesday, 27 October 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
होम » खबरनामा » अंकिता भंडारी हत्याकांड: उम्रकैद की सजा के बाद भी ‘VIP’ संदेह की परतें, धामी ने निराकरण की अपील की

अंकिता भंडारी हत्याकांड: उम्रकैद की सजा के बाद भी ‘VIP’ संदेह की परतें, धामी ने निराकरण की अपील की

उत्तराखंड के ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में 2022 में हुई अंकिता भंडारी की हत्या, जो शुरू में एक सामान्य हत्याकांड लग रहा था, अब अब भी राजनीतिक और न्यायिक चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। हालांकि 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास (उम्रकैद) की सजा सुना दी है, लेकिन प्रकरण से जुड़े ‘कथित VIP’ की संभावित भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल इस मामले को बंद नहीं होने दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संवेदनशील मुद्दे पर स्पष्ट रवैया अपनाते हुए कहा है कि अंकिता के नाम पर राजनीति करना उचित नहीं है, और सरकार ने घटना के पहले दिन से ही कानून के तहत हर संभव कार्रवाई की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता डिजिटल इंस्पेक्टर जनरल (DIG) स्तर की महिला IPS अधिकारी को सौंपी गई थी। पुलिस प्रशासन के अनुसार, घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। SIT ने अगले 88 दिनों में जोड़ी हुई तीब्र जांच के बाद डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर करीब 500 पेजों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। इस प्रक्रिया में लगभग 100 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई, जिसने अभियोजन पक्ष को न्यायालय में मजबूती प्रदान की।

सरकार द्वारा किए गए प्रशासनिक कदमों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और अंकिता के पिता व भाई को सरकारी नौकरी प्रदान करना शामिल है। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान परिवार की मांगों को गंभीरता से लिया गया, जिसके तहत सरकारी वकीलों को तीन बार बदला गया ताकि मुकदमे की पैरवी प्रभावी ढंग से हो सके। इन कदमों को सरकार ने पीड़ित परिवार को सामाजिक और आर्थिक सहारा देने की अपनी प्रतिबद्धता के प्रमाण के रूप में पेश किया है।

हालांकि, विपक्ष और आलोचकों ने लगातार इस तथ्य पर सवाल उठाए हैं कि क्या कानूनी प्रक्रिया के किसी चरण में ‘VIP’ का दखल था या नहीं। इस संबंध में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. वी. मुरुगेशन ने दोनों ही पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। डॉ. मुरुगेशन ने देहरादून में प्रेस वार्ता के दौरान पुष्टि की कि परिवार की मांग पर CBI जांच की अनुमति दे दी गई थी और यह जांच अभी भी जारी है। रेखा आर्या ने भी न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि जांच के निष्कर्ष आने तक प्रतीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि बिना पूरा होने के CBI जांच के आधार पर कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

मुख्यमंत्री धामी ने अंतिम बयान में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस संवेदनशील मामलों को बार-बार राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपियों की गिरफ्तारी, SIT की जांच, चार्जशीट और अंततः उम्रकैद की सजा मिलना यह साबित करता है कि न्यायिक प्रणाली ने अपना काम किया है। धामी के अनुसार, ‘VIP’ की भूमिका से जुड़े आरोप अभी तक सिद्ध नहीं हुए हैं और CBI की जारी जांच के निष्कर्ष ही इस संदेह को दूर करने या पुष्टि करने का अंतिम माध्यम होंगे। फिलहाल, न्यायिक निर्णय और प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद, यह मामला समाज में एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है कि कानून के समक्ष सभी समान हैं या नहीं, जैसा कि CBI की अंतिम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।