📅 Thursday, 29 October 2026 ⛅ 24°C नैनीताल / देहरादून 📈 SENSEX +420.5 (82,140)
Ad Space (728x90) - Appearance > Customize > Ad Placements
होम » खबरनामा » उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में चुनावी उथल‑पुथल, बड़े पदों की दावेदारी पर कड़ी जांच

उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में चुनावी उथल‑पुथल, बड़े पदों की दावेदारी पर कड़ी जांच

उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन (UFA) में इस महीने के मध्य से चल रही चुनावी हलचल ने मौजूदा पदाधिकारियों के बीच स्पष्ट डर पैदा कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, UFA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने कार्यस्थल को नैनीताल से उधम सिंह नगर जिले में बदल दिया है। साथ ही, एक ऐसा उम्मीदवार भी सामने आया है जिसने अभी तक किसी ज़िला फुटबॉल एसोसिएशन में एक भी कार्यकाल पूरा नहीं किया, फिर भी वह खुलकर कह रहा है, “मैं उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में एक बड़ा पद संभालने जा रहा हूँ।” ऐसी खुली दावेदारी ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

नए भारतीय फुटबॉल संविधान के अनुसार, प्रत्येक ज़िला फुटबॉल एसोसिएशन को कानूनी रूप से सोसाइटी या ‘नॉट‑फ़ॉर‑प्रॉफिट’ कंपनी के रूप में पंजीकृत होना अनिवार्य है। इसके अलावा, हर ज़िला एसोसिएशन में कम से कम छह क्लबों का पंजीकरण होना चाहिए और उन्हें अपनी पिछली तीन वर्षों की गतिविधियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करना होता है। नैनीताल और उधम सिंह नगर दोनों ही जिलों में अभी तक कोई जिला लीग आयोजित नहीं हो पाई है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या इन जिलों के अधिकारियों ने इन बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा किया है। यदि कोई अधिकारी अपने गृह जिले में DFA को सोसाइटी के रूप में पंजीकृत नहीं कर सका और लीग नहीं चलवा सका, तो बस स्थान बदलने से उन्हें कोई विशेष लाभ नहीं मिल सकता; उन्हें ऐसे क्लब या अकादमी से जुड़ा होना चाहिए जो इन मानकों को पूरा करता हो।

दूसरी ओर, एक और उम्मीदवार ने दावा किया है कि वह शीघ्र ही UFA की कार्यकारी समिति में एक प्रमुख पद ग्रहण करेगा। हालांकि, UFA के नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि राज्य कार्यकारी समिति के अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों पर तब तक कोई नहीं पहुँच सकता जब तक कि वह सदस्य पहले कम से कम एक पूर्ण कार्यकाल पूरी न करे। यह प्रतिबंध AIFF के संविधान की धारा 25.5 में भी स्पष्ट रूप से लिखा गया है: “कोई व्यक्ति अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कोषाध्यक्ष के पद के लिए चुनाव लड़ने या नामांकन पाने का पात्र नहीं होगा, जब तक कि वह व्यक्ति SOM न हो, या उसने पहले AIFF की कार्यकारी समिति में कम से कम एक पूर्ण कार्यकाल के लिए सदस्य के रूप में काम न किया हो, या AIFF की संबद्ध इकाई में पदाधिकारी के बराबर के पद पर काम न किया हो।” इस नियम का उल्लंघन करने वाले दावेदारों को अब कड़ी जांच का सामना करना पड़ेगा।

आगे की प्रक्रिया भी स्पष्ट हो गई है। उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन को तीन हफ्ते पहले वोटरों की सूची जारी करनी थी, परन्तु अब रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा आपत्तियों की मांग की जाएगी और अंतिम सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। साथ ही, खेल से जुड़े सभी विवादों को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार का स्पोर्ट्स ट्राइब्यूनल जल्द ही अपना काम शुरू करेगा। इस बदलते परिदृश्य में, इच्छुक उम्मीदवारों को यह समझना आवश्यक है कि पुराने समय की तरह हेर-फेर अब संभव नहीं है; पारदर्शी और नियमबद्ध चुनावी प्रक्रिया ही अब आगे का मार्ग तय करेगी।

Original Title: फुटबॉल एसोसिएशन में चुनावी हलचल तेज!, बड़े पदों की दावेदारी पर उठे सवाल

Original Content: उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में नई हलचल से मौजूदा पदाधिकारियों में डर दिख रहा है। खबर है कि उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन के एक पदाधिकारी नैनीताल से उधम सिंह नगर ज़िले में अपना बेस बदल रहे हैं। एक व्यक्ति, जिसने किसी भी ज़िला फुटबॉल एसोसिएशन में एक भी कार्यकाल पूरा नहीं किया है, वह कई लोगों से कह रहा है, “मैं उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में …. (एक बड़ा पद) संभालने जा रहा हूं।” फुटबॉल एसोसिएशन में चुनावी हलचल तेज! अब नैनीताल से उधम सिंह नगर जाने के मामले को देखें। हर ज़िला फुटबॉल एसोसिएशन एक कानूनी संस्था होनी चाहिए; इसे सोसाइटी या ‘नॉट-फॉर-प्रॉफिट’ कंपनी के तौर पर रजिस्टर होना ज़रूरी है। हर ज़िला फुटबॉल एसोसिएशन में छह क्लब होने चाहिए और उन्हें अपनी तीन साल की गतिविधियों का ब्यौरा देना होगा। नए इंडियन फुटबॉल संविधान में यही कहा गया है। सोसाइटी या कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड होना जरूरी अगर कोई व्यक्ति नैनीताल से उधम सिंह नगर इसलिए जा रहा है क्योंकि वह अपने गृह ज़िले में DFA को सोसाइटी के तौर पर रजिस्टर नहीं करा पाया और ज़िला लीग नहीं करवा पाया, तो इससे कोई खास फायदा नहीं होगा। उसे किसी ऐसे क्लब या अकादमी से जुड़ा होना दिखाना होगा जो सोसाइटी या कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड हो और पिछले तीन सालों से ज़िला फुटबॉल लीग में खेल रहा हो। नैनीताल और उधम सिंह नगर, दोनों ही ज़िलों में ज़िला लीग नहीं हो पाई थी। उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में बड़ा पद संभालने का दावा दूसरा मामला एक ऐसे व्यक्ति का है जो दावा कर रहा है कि वह जल्द ही उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में कोई बड़ा पद संभालेगा। राज्य कार्यकारी समिति में एक कार्यकाल पूरा किए बिना कोई भी व्यक्ति राज्य फुटबॉल एसोसिएशन का अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष नहीं बन सकता। AIFF संविधान की धारा 25.5 में क्या है? नए AIFF संविधान की धारा 25.5 में यह साफ तौर पर कहा गया है, “कोई व्यक्ति अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कोषाध्यक्ष के पद के लिए चुनाव लड़ने या नामांकन पाने का पात्र नहीं होगा, जब तक कि वह व्यक्ति SOM न हो, या उसने पहले AIFF की कार्यकारी समिति में कम से कम 1 (एक) पूर्ण कार्यकाल के लिए सदस्य के रूप में काम न किया हो, या AIFF की संबद्ध इकाई में पदाधिकारी के बराबर के पद पर काम न किया हो।” उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन के इच्छुक उम्मीदवार नैनीताल से उ

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।