नैनीताल जिले के प्रमुख शहर हल्द्वानी में सार्वजनिक पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता का माहौल चरम पर है, जहाँ नवाबी रोड स्थित दुर्गा कॉलोनी में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा सुहानी पंत की पीलिया (Jaundice) से मौत हो गई है। यह घटना महज एक व्यक्तिगत दुर्भाग्य नहीं, बल्कि कॉलोनी के करीब 120 निवासियों की लंबे समय से बनाई जा रही शिकायतों की असफलता का परिणाम है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक महीने से उनके घरों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है, जिसके बावजूद आधिकारिक तौर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सुहानी, जो गंगोलीहाट की रहने वाली थीं और दुर्गा कॉलोनी में अपनी बुआ के साथ रहती थीं, कुछ दिनों पहले अस्वस्थ महसूस करने लगीं। निजी प्रयोगशाला में उनकी जांच के दौरान पीलिया की पुष्टि होने के बाद, उन्हें बरेली स्थित राममूर्ति अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, तीव्र चिकित्सा के बावजूद उन्हें तीन दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। उनके परिजन शव लेकर गंगोलीहाट लौट आए हैं, जहाँ शोक की लहर दौड़ गई है।
सुहानी की मौत के तुरंत बाद, इसी कॉलोनी में दो अन्य बच्चों के भी पीलिया से पीड़ित होने की खबरें सामने आईं, जिसने स्थिति को और गंभीर बना दिया। स्थानीय निवासी राजेश कटारिया के बेटे को 3 अक्टूबर को पीलिया के लक्षण दिखाई देने के बाद बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिन्हें अब छुट्टी मिल चुकी है। वहीं, आशीष रौतेला को अपने बेटे के बेहतर इलाज के लिए दिल्ली जाना पड़ा। इस घटनाक्रम के बाद, जल संस्थान (Jal Sansthan) और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गुरुवार को मौके पर पहुंचे। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरएस लोशाली, सहायक अभियंता रविंद्र कुमार और कनिष्ठ अभियंता दीपक शर्मा की टीम ने तुरंत पेयजल की आपूर्ति रोक दी और पानी के नमूने लेकर विस्तृत जांच के लिए भेज दिए। उनके अनुसार, प्रारंभिक भौतिक जांच में पानी में प्रत्यक्ष संदूषण का स्पष्ट सबूत नहीं मिला, लेकिन बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि या अस्वीकृति के लिए नमूने को अलग से परखा जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. ममता सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने कॉलोनी में घर-घर जाकर 31 लोगों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया। टीम ने पानी के नमूनों की क्लोरीनेशन जांच भी की, जिसमें प्रारंभिक रिपोर्ट में सभी नमूने मानक माने गए। हालांकि, अंतिम और निर्णायक रिपोर्ट के लिए तीन नमूनों को सुशीला तिवारी अस्पताल के प्रयोगशाला में भेजा गया है, जिनके परिणाम आने के बाद ही पानी की वास्तविक गुणवत्ता और संक्रमण के स्रोत को लेकर स्पष्टता आएगी। कॉलोनी में सुबह नलकूप और शाम को गौला की लाइन से पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन स्थानीयवासी दावा करते हैं कि सुबह के 10 से 15 मिनट तक निकलने वाला पानी बेहद गंदा होता है। कई परिवार पानी को उबालकर पीने के बावजूद बीमारी फैलने के डर में जी रहे हैं।
इस घटना के बाद, स्थानीय पार्षद राजेंद्र जीना ने बताया कि पहले ही संबंधित विभागों को गंदे पानी की शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन उचित निगरानी न होने के कारण यह स्थिति बनी। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. मनोज कांडपाल ने आश्वासन दिया कि अब क्षेत्र में जलजनित बीमारियों, डेंगू, मलेरिया और अन्य वेक्टर-जनित रोगों की नियमित और सख्त निगरानी की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि उन्हें या उनके परिवार के किसी सदस्य को किसी संदिग्ध बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो वे तुरंत मोबाइल नंबर 9410119773 पर संपर्क करें। वहीं, अन्य स्थानीय निवासियों जैसे बीएस बिष्ट और गंगा पांडे ने भी पानी से आती बदबू और उसकी गुणवत्ता को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हल्द्वानी में पेयजल प्रबंधन की व्यवस्था को पुनर्जाने की जरूरत है।
