बॉलीवुड की जलवा बिखेरने वाली और आध्यात्मिक गहराई से जुड़ी अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने इस बार भी उत्तराखंड की पवित्र धरती को अपनाया। गुरुवार, 8 अक्टूबर को रानी ने अपनी पारंपरिक यात्रा का आगाज़ करते हुए केदारनाथ धाम पहुंचीं, जहां उन्होंने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर मन को शांति का आशीर्वाद लिया। उनकी इस यात्रा का मकसद केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि श्राद्ध पक्ष के पवित्र अवसर पर अपने वंशजों की स्मृति में कर्मकांड करवाना भी था। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र स्थल ने अभिनेत्री को एक बार फिर से आध्यात्मिक अनुभूति से भर डाला, जिसने उनके कलात्मक और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर गहरा प्रभाव डाला।
रानी मुखर्जी के केदारपुरी पहुंचने की खबर जैसे ही प्रसारित हुई, वहां भारी संख्या में प्रशंसक और तीर्थयात्री इकट्ठा हो गए। स्थानीय तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, रानी ने केदारपुरी की अतुल्य सुंदरता और हिमालयी वातावरण को महसूस किया। उन्होंने अपनी भावनाओं का इजहार करते हुए कहा, “बाबा केदारनाथ की नगरी स्वर्ग के समान है। यहां पहुंचने के बाद मेरे मन को अपार शांति का अनुभव हुआ। केदारनाथ धाम की आध्यात्मिक ऊर्जा और यहां का वातावरण अपने आप में अद्भुत है।” उनकी यह प्रतिक्रिया न केवल उनके वैयक्तिक अनुभव को दर्शाती है, बल्कि केदारनाथ के धार्मिक महत्व को भी रेखांकित करती है।
यात्रा के दौरान रानी मुखर्जी ने केवल पूजा-अर्चना ही नहीं की, बल्कि वे धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों पर भी गौर किया। उन्होंने स्थानीय पुरोहितों से विस्तृत चर्चा करते हुए यह जानने का प्रयास किया कि भूस्खलन के बाद धाम के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ रही है। इस बातचीत से स्पष्ट होता है कि अभिनेत्री केवल एक पर्यटक के रूप में नहीं, बल्कि एक जागरूक नागरिक के रूप में भी स्थानीय मुद्दों से जुड़ी हुई हैं। उनके द्वारा धाम में बिताया गया समय दर्शाता है कि उन्होंने इस यात्रा को एक गहन आध्यात्मिक अनुभव के रूप में लिया है।
अपने पूर्वजों की स्मृति में पूजा करवाकर और बाबा केदार का आशीर्वाद लेकर, रानी मुखर्जी ने अपनी यात्रा का अगला चरण शुरू किया। उन्होंने बदरीनाथ के लिए रवाना होकर बदरी विशाल के दर्शन किए और वहां भी पूजा-अर्चना का पालन किया। रानी मुखर्जी के लिए यह पहली बार नहीं है कि वे चारधाम यात्रा का हिस्सा बनीं हैं; वे अक्सर केदारनाथ और बदरीनाथ की यात्रा पर निकलती हैं, जो उनके जीवन का एक अहसंग भाग बन चुका है। उनकी यह नियमित यात्रा न केवल उनके धार्मिक प्रेम को दर्शाती है, बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन और आध्यात्मिक परंपराओं को भी समृद्ध करती है।
