उत्तराखंड के राजनीतिक पटल पर एक और अजीबोगरीब घटनाक्रम हो गया है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर “वोट बचाओ-देश बचाओ” के संदेश के साथ निकली कांग्रेस की प्रमुख यात्रा का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। हरिद्वार में रेलवे स्टेशन के नजदीक हुई इस घटना ने न केवल पार्टी की अंदरूनी खींचतान को खुलेआम प्रदर्शित कर दिया, बल्कि इस बात को भी स्पष्ट कर दिया कि कैसे व्यक्तिगत मतभेदों को सार्वजनिक मंच पर लाने से राजनीतिक दलों के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है। यह घटना ऐसे संवेदनशील समय में हुई, जब कांग्रेस पार्टी अपनी जनसंपर्क अभियान के जरिए वोटर्स का विश्वास जीतने की कोशिश में लगी थी, लेकिन सड़क पर हुए इस विवाद ने उस संदेश की प्रभावशीलता को प्रभावित किया।
घटना की शुरुआत बुधवार के दिन हुई, जब लालढांग क्षेत्र के पूर्व जिला पंचायत सदस्य गुरजीत लहरी और रुड़की क्षेत्र के प्रभावशाली कांग्रेस नेता जितेंद्र पंवार के बीच एक तीव्र बहस शुरू हो गई। बताया जाता है कि इस विवाद की जड़ें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर की गई एक टिप्पणी में थी। गुरजीत लहरी ने स्पष्ट रूप से जितेंद्र पंवार की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई, जिससे दोनों के बीच का तनाव इतना बढ़ गया कि बात कानों-कानों के स्तर से आगे बढ़कर हाथापाई की स्थिति बन गई। यह दृश्य सड़क पर खड़े आम लोगों और पार्टी के समर्थकों के लिए शर्मनाक था, क्योंकि पार्टी के अपने ही वरिष्ठ नेता एक-दूसरे के साथ भिड़ गए।
मौके पर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तत्काल प्रतिक्रिया दिखाते हुए दोनों नेताओं के बीच बीच-बचाव किया और उन्हें अलग किया, जिससे स्थिति और बिगड़ने से बची। घटना के बाद गुरजीत लहरी ने मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया कि इस पूरे विवाद की उत्पत्ति निचले स्तर की टिप्पणी से हुई थी, और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और पूर्व प्रमुख चेहरों का सम्मान करना हर कार्यकर्ता का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि व्यक्तिगत मतभेदों को सार्वजनिक मंच पर लाना राजनीतिक संस्थाओं की इज्जत के साथ धोखा है, और ऐसे माहौल से बचने के लिए सभी को सतर्क रहना चाहिए।
हलांकि, इस पूरे विवाद के दूसरे पक्ष, यानी जितेंद्र पंवार और उनके समर्थकों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस घटना ने कांग्रेस की हरिद्वार यात्रा के दौरान चले जा रहे राजनीतिक संदेश पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। जबकि पार्टी “देश बचाओ” के संवाद में लगी थी, उसकी अपनी अंदरूनी संरचना में चल रही खींचतान ने यह सवाल उठा दिया है कि क्या पार्टी अपने अंदर एकजुटता बनाए रखने में सक्षम है? यह घटनास्थल पर देखे गए दृश्यों ने देशभर के राजनीतिक विश्लेषकों और वोटर्स के बीच चर्चा का विषय बना दिया है, विशेषकर तब जब उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस का भविष्य अब और भी बहस का विषय बन गया है।
