उधम सिंह नगर की स्थानीय राजनीति में एक नया और गहन चर्चा का विषय सामने आ गया है, जहां किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका परिषद के चुनाव परिणामों ने क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। कांग्रेस पार्टी के खाते में दोनों ही नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पद आने से पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में उल्लेखनीय उत्साह की लहर दौड़ गई है। हालांकि, किच्छा में भाजपा के प्रत्याशी के पराजय के बाद राजनीतिक प्रभाव और रणनीति के सवाल उठने लगे हैं। विशेष रूप से, भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की चुनावी प्रबंधन और संगठनात्मक रणनीति को लेकर स्थानीय राजनीतिक गलियारों में तीव्र बहस शुरू हो गई है, जिससे यह समझने को मिल रहा है कि आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति का रास्ता कहाँ से बहेगा।
किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह ने भाजपा के संदीप अरोड़ा को हराकर जीत दर्ज की, जबकि सिरौलीकलां में कांग्रेस की राशिदा बेगम ने निर्दलीय प्रत्याशी फरहीन जहां को भारी अंतर से शिकस्त दी। सिरौलीकलां के परिणाम अधिक स्पष्टता से जीत की प्रतिकृति दर्शाते हैं, जहां राशिदा बेगम को 5,434 वोटों का समर्थन मिला, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी फरहीन जहां को 3,661 वोट मिले। प्रशासनिक रूप से, मतगणना की प्रक्रिया को सुचारू और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। किच्छा में 20 मतगणना टेबल स्थापित किए गए थे, जबकि सिरौलीकलां में चार टेबल पर मतों की गिनती हुई। सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया और ड्रोन के जरिए भी नजर रखी गई।
चुनाव की प्रक्रिया के दौरान तनाव की घटनाएं भी देखी गईं, जिसने स्थानीय राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। मतदान के तुरंत बाद, स्ट्रांग रूम के बाहर कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ और भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के समर्थकों के बीच विवाद देखने को मिला। स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने दोनों पक्षों के प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके पश्चात, मतगणना को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच गया, और अंततः सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत 7 अक्टूबर को दोनों नगर पालिकाओं की मतगणना कराई गई। यह चरण राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तीव्र स्तर को रेखांकित करता है, जहां न केवल प्रत्याशियों की जीत-हार, बल्कि नेताओं के राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा भी ली गई।
सिरौलीकलां में कांग्रेस की जीत केवल अध्यक्ष पद तक सीमित नहीं रही, बल्कि पार्टी ने चारों वार्डों में भी जीत दर्ज करके अपनी पकड़ को और मजबूत किया। इस व्यापक जीत ने कांग्रेस के लिए नगर पालिका चुनाव का परिणाम एक ऐतिहासिक सफलता में बदल दिया है। इसके विपरीत, किच्छा में भाजपा के प्रत्याशी संदीप अरोड़ा की हार ने राजेश शुक्ला की राजनीतिक भूमिका को प्रश्न चिह्न में डाल दिया है। चुनाव से पहले, शुक्ला की सक्रियता और संदीप अरोड़ा के समर्थन में उनके प्रयासों को देखते हुए, इस सीट का परिणाम उनके लिए राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा था। अब स्थानीय राजनीति में यह सवाल उठ रहा है कि इन नतीजों का आने वाले समय में दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों, खासकर भाजपा के संगठनात्मक ढांचे और राजेश शुक्ला के भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर क्या असर पड़ेगा।
