उत्तराखंड के चमोली जिले की दूरस्थ निजमूला घाटी में एक अहम संचार साधन के रूप में काम करने वाले BSNL मोबाइल टावर की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। इस कार्रवाई का सीधा और गहरा असर क्षेत्र के करीब 15 ग्राम सभाओं पर पड़ा है, जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया है। घाटी के ग्रामीण अब फोन कॉल्स, इंटरनेट एक्सेस और अन्य जरूरी संचार सेवाओं से वंचित हैं, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। यह स्थानीय स्तर पर एकमात्र उपलब्ध संचार केंद्र था, जिसके बंद होने से दूरदराज के गांवों में डिजिटल कनेक्टिविटी का सिलसिला ही रुक गया है।
इस विवाद का मूल कारण BSNL पर लगे करीब 10 लाख 7 हजार 280 रुपये का बकाया बिजली बिल बताया जा रहा है। विद्युत विभाग के जेई दीपक राणा के अनुसार, बीएसएनएल को बकाया राशि जमा करने के लिए कई बार लिखित सूचनाएं भेजी गईं, लेकिन कोई भी भुगतान नहीं किया गया। उच्चाधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के तहत ही विद्युत विभाग ने टावर का कनेक्शन काटने का फैसला लिया। इस कार्रवाई से पहले कई महीनों तक बकाया बिल का प्रबंधन न करने की आलोचना की जा रही है, जिसका नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है।
दूसरी ओर, BSNL ने विद्युत विभाग की इस कार्रवाई पर तीव्र आपत्ति जताई है। BSNL के एसडीओ राजेश सैनी का दावा है कि विद्युत विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना या बिल उपलब्ध कराए टावर की बिजली काट दी। उनका कहना है कि बकाया राशि के लिए प्रक्रियाधीन चर्चा चल रही थी, लेकिन अचानक कनेक्शन काटने से पूरे क्षेत्र की संचार व्यवस्था में गड़बड़ी आई है। बीएसएनएल का मानना है कि जनहित में ऐसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सेवाएं बिना किसी पूर्व सूचना के निलंबित करना उचित नहीं है।
स्थानीय लोगों और नेताओं ने इस मामले पर जोरदार प्रतिक्रिया दी है। ब्यारा के पूर्व प्रधान बृजलाल ने बताया कि निजमूला घाटी में यह BSNL का एकमात्र मोबाइल टावर है, जिसके बंद होने से दूर रहने वाले परिजनों से संपर्क करने की संभावनाएं ही खत्म हो गई हैं। विशेष रूप से आपातकालीन स्थितियों में, जहां फोन का उपयोग अत्यंत आवश्यक होता है, लोगों को गंभीर दिक्कत सामने आ रही है। इसी कड़ी में, बीजेपी नेता बीरेंद्र फर्स्वाण ने विद्युत विभाग और BSNL से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया कि दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में संचार सुविधा एक बेहद जरूरी आवश्यकता है, और विभागों के बीच चल रहे प्रशासनिक विवाद का नुकसान आम जनता को उठाना नहीं पड़ना चाहिए।
फिलहाल, मामला दोनों पक्षों के बीच अटका हुआ है, जिससे निजमूला घाटी के ग्रामीण संचार के अंधेरे में जी रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह घटना न केवल बुनियादी ढांचे की कमी को उजागर करती है, बल्कि सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी की भी झलक पेश करती है। अब देखना यह है कि क्या दोनों विभाग जल्द ही एक समझौते पर पहुंच पाते हैं या फिर दूरस्थ गांवों के लोग लंबे समय तक इस संचार विहीन स्थिति में रहने को मजबूर होंगे।
