उत्तराखंड के चंपावत जिले में बेरोजगार युवाओं को आर्मी की नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वालेorganized गिरोह का पुलिस ने बड़ा खुलासा कर दिया है। बनबसा पुलिस और एसओजी (Special Operations Group) की संयुक्त टीम ने इस चालबाज़ी को उजागर करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला तब सामने आया जब मिलिट्री इंटेलिजेंस, लखनऊ मुख्यालय ने 28 सितंबर को सूचना दी थी, जिसके आधार पर टनकपुर निवासी गुरु शरण सिंह ने बनबसा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी धीरज सक्सेना और उसके सहयोगी गणेश बहादुर ने MES (मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस) में नौकरी लगवाने का झांसा देकर पीड़ितों से करोड़ों की ठगी की तैयारी की थी, जिसमें अबतक पांच हजार रुपये नकद और 1.40 लाख रुपये UPI के जरिए वसूल किए गए थे।
जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने पीड़ितों को कमल पथ आर्मी एरिया बनबसा के पास बुलाया, जहाँ उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र दिए गए और बायोमेट्रिक प्रक्रिया के लिए तैयार रहने को कहा गया था। जब पीड़ित वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वहां खटीमा और राजस्थान सहित कई अन्य अभ्यर्थी भी उपस्थित थे, जिनसे भी ठगी की गई थी। इस घटना के दौरान, धीरज सक्सेना ने अपने साथी गणेश बहादुर के साथ स्कूटी पर बैठकर मौके से फरार हो जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की छापेमारी में वे पकड़े गए। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से कुल 46 फर्जी नियुक्ति पत्र, कूटरचित दस्तावेज, MES की फर्जी मोहरें, स्टांप पैड, अभ्यर्थियों के फोटो, मेडिकल प्रमाण पत्र, दो मोबाइल फोन (Realme और Vivo) और एक TVS Vego स्कूटी बरामद की है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, धीरज सक्सेना के मोबाइल फोन की डिजिटल फोरेंसिक जांच में लाखों रुपये के आने-जाने के लेनदेन के ठोस सबूत मिले हैं, जो इस ठगी के नेटवर्क की बड़ी तादाद और वित्तीय प्रवाह को दर्शाते हैं। आरोपियों के कब्जे से बरामद 35 अभ्यर्थियों के जॉइनिंग लेटर और 11 अभ्यर्थियों की फाइलें इस बात का प्रमाण हैं कि यह एक सिस्टमैटिक और संगठित अपराध था। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने आर्मी की प्रभुत्व में काम करने का भ्रम पैदा करके भविष्य के संभावित कर्मचारियों के विश्वास का दुरुपयोग किया।
फिलहाल, बनबसा पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम इस पूरे मामले में जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की पहचान करने और ठगी की कुल रकम का सटीक आंकलान लगाने में जुटी है। बरामद हुए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की गहन जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने और बेरोजगार युवा इसं चालबाज़ी के शिकार हुए हैं। पुलिस ने जनता को सलाह दी है कि आर्मी या किसी भी सरकारी नौकरी के नाम पर किसी भी व्यक्ति से पैसे न लें और ऐसे झूठे वादे पर भरोसा न करें, ताकि वे इस तरह की ठगी से बच सकें। यह कार्रवाई युवाओं के विश्वास का दुरुपयोग करने वाले ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रतीक है।
