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फर्जी दस्तावेज़ बनवाकर MBBS में दाखिला दिलाने की जालसाज़ी पर SIT ने तीसरे आरोपी को गिरफ्तार किया

मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत MBBS में दाखिला दिलाने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के जालसाज़ी के मामले में राज्य सूचना एवं जांच टीम (SIT) ने तीसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है। 27 अगस्त 2024 को जांच टीम ने भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया, जिनके कब्जे से लगभग पाँच लाख रुपये की धनराशि भी जब्त की गई। यह गिरफ्तारी पहले से ही दो आरोपियों के पकड़ने के बाद हुई है, जिससे मामले में एक नया मोड़ आया है।

धीरज कुमार के पास “MBBS वे” नामक एक कार्यालय था, जहाँ वह निजी विश्वविद्यालयों में MBBS, BE, BCA, BBA, और BCom जैसे पाठ्यक्रमों में छात्रों को दाखिले के लिए कमीशन आधारित सेवाएँ देता था। जांच में पता चला कि वह और उसके साथी रूपेश पंडित समेत अन्य लोगों ने तीन अभ्यर्थियों के लिए जाली दस्तावेज़ तैयार कराए थे। इन दस्तावेज़ों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए गए और उन्हें MBBS में दाखिला दिलाने के प्रयास में इस्तेमाल किया गया।

साक्षात्कार के दौरान आरोपी ने बताया कि उसके पास से जब्त की गई पाँच लाख रुपये की राशि पूर्व में रूपेश पंडित द्वारा उसे दी गई थी। उसने दावा किया कि यह रकम कुछ छात्रों को आश्रित कोटे के तहत MBBS में दाखिला दिलाने के बदले में कमीशन के रूप में दी गई थी।

SIT की जांच में यह भी सामने आया कि धीरज कुमार और उसके साथियों ने फर्जी दस्तावेज़ों पर डिजिटल हस्ताक्षर लगाने के लिए विभिन्न तकनीकी साधनों का उपयोग किया। अब SIT इन डिजिटल हस्ताक्षरों की वैधता और उनके निर्माण के तरीके पर गहराई से जाँच कर रही है। साथ ही, फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और दाखिले की पूरी प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की पहचान और भूमिका भी जांच के दायरे में है।

इस केस से यह स्पष्ट होता है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के दुरुपयोग के लिए जाली दस्तावेज़ बनवाने की योजना कितनी जटिल और संगठित हो सकती है। पुलिस और SIT द्वारा की गई इस कार्रवाई से शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश मिलता है।

admin सत्यापित पत्रकार

आधिकारिक पत्रकार एवं विशेष संवाददाता।

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